CGPSC घोटाला: जांच की आंच तेज, ED ने 12 लोगों को भेजा समन...
पूर्व CM के तत्कालीन OSD और वर्तमान अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया गिरफ्तार, ED रिमांड पर।
चयन और पर्चा लीक के नाम पर वसूले गए 3.2 करोड़ रुपये के लेन-देन की पड़ताल तेज।
2019 से 2023 के बीच के डिजिटल साक्ष्यों (चैट/कॉल डिटेल) में मिले पैसों और इंटरव्यू में मदद के प्रमाण।
रिटायर्ड IAS टामन सिंह सोनवानी समेत कई अधिकारियों की संपत्ति अटैच करने की तैयारी।

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से जुड़े कथित पर्चा लीक और चयन गड़बड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। मामले की तह तक जाने के लिए जांच एजेंसी ने 12 लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया है, जिनमें वे अभ्यर्थी भी शामिल हैं जिन्होंने कथित तौर पर पैसे दिए थे।
गिरफ्तारी और पूछताछ -
जांच एजेंसी ने बलरामपुर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन ओएसडी (OSD) और वर्तमान में अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। फिलहाल वे ईडी की रिमांड पर हैं। इससे पहले ED ने धमतरी स्थित उनके पैतृक आवास पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे। इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
3.2 करोड़ के मनी ट्रेल की जांच -
सूत्रों के मुताबिक, ED इस बात की जांच कर रही है कि चयन में मदद और पर्चा लीक के नाम पर वसूले गए लगभग 3.2 करोड़ रुपये में से कितनी रकम चेतन बोरघरिया और अन्य रसूखदारों तक पहुंची। जांच में विकास, अनिल और उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिनके माध्यम से कथित तौर पर अभ्यर्थियों से संपर्क कर पैसों का लेन-देन किया गया था।
डिजिटल साक्ष्यों से खुले राज -
CBI से मिले इनपुट और अपनी मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) जांच के आधार पर, ED ने 2019 से 2023 के बीच आरोपियों की कॉल डिटेल्स और चैट्स का विश्लेषण किया है। जांच में सामने आए चैट्स में पैसे के लेन-देन, पर्चा उपलब्ध कराने और इंटरव्यू में मदद करने जैसी संदिग्ध बातचीत के सीधे उल्लेख मिले हैं।
संपत्ति कुर्की की तैयारी -
वित्तीय लेन-देन के साथ-साथ ED ने आरोपियों की संपत्तियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कारोबारी श्रवण कुमार गोयल, सेवानिवृत्त IAS टामन सिंह सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव, राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी आरती वासनिक और ललित गणवीर समेत कई लोगों की संपत्तियों का ब्योरा जुटा लिया गया है। अपराध से अर्जित आय के पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद, अब इन संपत्तियों को अटैच (कुर्क) करने के लिए अदालत में आवेदन देने की प्रक्रिया चल रही है।






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