वोटर लिस्ट और SIR विवाद: चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का उग्र प्रदर्शन, बैरिकेड पर चढ़े नेता....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नयी दिल्ली: देश की राजधानी में मतदाता सूची में कथित धांधली और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार को इंडिया गठबंधन के तमाम दिग्गज नेताओं और सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग के दफ्तर की तरफ मार्च निकाला। विपक्ष इस मामले में निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
बैरिकेड पर चढ़े नेता और पुलिस से भिड़ंत
मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच जब विपक्षी सांसदों का मार्च नीति आयोग के पास पहुंचा, तो पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद विरोध प्रदर्शन ने और तूल पकड़ लिया। सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान राहुल और प्रियंका ने हाथों में तिरंगा थाम रखा था और वे पुलिस के लगाए गए बैरिकेड पर चढ़ते हुए नजर आए। इस दौरान आयोग और सरकार विरोधी तीखे नारे भी गूंजे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और लंबा ट्रैफिक जाम भी लग गया।
क्यों गरमाई है सियासत?
विपक्षी दलों का मुख्य आरोप है कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और SIR प्रक्रिया के जरिए मतदान के अधिकार पर प्रहार किया जा रहा है। इस पूरे विवाद के केंद्र में फॉर्म-6 भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है, जिससे यह मामला और तूल पकड़ गया है। विपक्षी नेताओं का यह भी आरोप है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग एकतरफा फैसले ले रहे हैं।
आयोग और भाजपा का पलटवार -
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। आयोग का साफ कहना है कि फॉर्म-6 में कोई भी वैधानिक बदलाव नहीं किया गया है और फैलाए जा रहे दावे भ्रामक हैं। आयोग का तर्क है कि मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के लिए पुनरीक्षण बेहद आवश्यक है। हालांकि, बढ़ते विरोध को देखते हुए आयोग ने उन राज्यों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जहां यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ताकि छूटे हुए लोग दोबारा जुड़ सकें।
फिलहाल, इस सियासी बवाल ने राष्ट्रीय राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। विपक्षी खेमे का साफ कहना है कि वे इस लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से लड़ेंगे, जबकि सबकी नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग इन तीखे आरोपों पर आगे क्या रुख अपनाता है।






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