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जमीन विवाद में विशाल कुमार गुप्ता को दोहरी कानूनी राहत: सत्र न्यायालय के बाद हाईकोर्ट में भी याचिका खारिज.....

2 hours ago
3 min read
  • 2019 की जमीन रजिस्ट्री से शुरू हुआ था विवाद, धोखाधड़ी-कूटरचना के आपराधिक मामले से लेकर हाईकोर्ट की रिट अपील तक पहुंचा मामला...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

रामानुजगंज/बलरामपुर/बिलासपुर,।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से जुड़े एक जमीन विवाद में न्यायिक कार्यवाहियों को लेकर नया मोड़ सामने आया है।




















ग्राम भेदमी (पुटसुरा) निवासी विशाल कुमार गुप्ता की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि विवादित भूमि के मामले में उन्हें निचली अदालत से लेकर सत्र न्यायालय और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। इस मामले में जमीन की बिक्री, कथित गलत शपथ पत्र, दस्तावेजों की वैधता और बाद में की गई शिकायतों को लेकर कई न्यायिक कार्यवाहियां हुई हैं।


2019 की रजिस्ट्री के बाद सामने आया भूमि के स्वरूप का विवाद -

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, विवाद की शुरुआत ग्राम दहेजवार स्थित खसरा नंबर 221 की 0.18 हेक्टेयर भूमि से हुई। विशाल कुमार गुप्ता का आरोप है कि द्वारिका प्रसाद गुप्ता ने उक्त जमीन को अपनी निजी मालिकाना भूमि बताते हुए उनसे चेक के माध्यम से राशि प्राप्त की और 20 मई 2019 को विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) का पंजीयन कराया।


बाद की जांच एवं राजस्व कार्यवाही में उक्त भूमि के शासकीय पट्टे से संबंधित होने का तथ्य सामने आया। विशाल कुमार गुप्ता पक्ष का दावा है कि ऐसी स्थिति में भूमि के हस्तांतरण के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक थी, लेकिन कथित रूप से गलत तथ्यों के आधार पर शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया। इसी विवाद को आधार बनाकर राजस्व अधिकारियों द्वारा विक्रय पत्र को प्रभावशून्य घोषित किए जाने की बात कही गई है।


JMFC के आदेश से दर्ज हुआ आपराधिक मामला -

विशाल कुमार गुप्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC), बलरामपुर ने 10 फरवरी 2025 को एक आदेश पारित किया। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि इस आदेश के आधार पर द्वारिका प्रसाद गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 एवं 468 के तहत आपराधिक प्रकरण (क्रमांक 222/2025) दर्ज हुआ।


सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज -

JMFC के आदेश के खिलाफ द्वारिका प्रसाद गुप्ता की ओर से प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रामानुजगंज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका (प्रकरण क्रमांक 09/2025) दायर की गई थी। 26 मई 2026 को न्यायालय ने यह पुनरीक्षण याचिका निरस्त कर दी। विशाल गुप्ता पक्ष इसे अपने पक्ष में दूसरी महत्वपूर्ण न्यायिक राहत मान रहा है।


हाईकोर्ट तक पहुंची कार्यवाही, रिट अपील खारिज -

आपराधिक प्रकरण के बाद द्वारिका प्रसाद गुप्ता, विकेश गुप्ता और अलीमुद्दीन द्वारा शिकायतों एवं अन्य कानूनी कार्यवाहियों के माध्यम से विशाल कुमार गुप्ता पर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।


मामले का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में सामने आया। WA No. 871/2026 में 18 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने फैसला सुनाया। पीठ में शामिल मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र एवं न्यायमूर्ति संतोष शर्मा ने अलीमुद्दीन की ओर से दायर रिट अपील खारिज कर दी। न्यायालय ने शिकायतकर्ता के वैधानिक अधिकार (Locus Standi) के प्रश्न पर विचार करते हुए अपील को अस्वीकार कर दिया। मामले में अधिवक्ता सौरभ साहू की पैरवी को विशाल गुप्ता ने सराहनीय बताया है।


भूमि हस्तांतरण पर हाईकोर्ट का अहम रुख -

हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विवादित जमीन वर्ष 1987 में द्वारिका प्रसाद गुप्ता को आवंटित हुई थी। 20 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें उक्त जमीन का भूमिस्वामी माना गया। हाईकोर्ट के समक्ष भूमि हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति के प्रश्न पर भी विचार हुआ, जिसमें न्यायालय ने उस समय पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं मानी। यह बिंदु पूरे विवाद में निर्णायक माना जा रहा है।


कानून पर कायम हुआ भरोसा -

विशाल कुमार गुप्ता ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विवाद के दौरान उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अदालतों में हुई कार्यवाहियों और निष्पक्ष फैसलों ने न्याय व्यवस्था में उनके विश्वास को और मजबूत किया है।


इस पूरे मामले ने भूमि आवंटन, राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री और दस्तावेजी पारदर्शिता से जुड़े कई अहम कानूनी सवाल भी खड़े किए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप विशाल कुमार गुप्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं, जिस पर दूसरे पक्ष की विधिक प्रतिक्रिया भी मामले की पूरी तस्वीर साफ करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।


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