विजय शर्मा चुनाव आयोग के स्वयं भू प्रवक्ता मत बने - कांग्रेस...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में मतदाता सूची से नाम विलोपन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस पूरी प्रक्रिया को राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक घोटाला करार दिया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार और भाजपा के नेता अपनी संभावित हार से घबराकर चुनाव आयोग के तंत्र का खुलेआम दुरुपयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के नाम पर राज्यभर में लगभग 25 लाख वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से चुपचाप हटा दिए गए हैं। इसमें करीब 19 लाख से अधिक लोगों को अनुपस्थित या शिफ्टेड और 6 लाख से ज्यादा को मृत बता दिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह सब बिना किसी जमीनी और भौतिक सत्यापन के केवल कंप्यूटर के फिल्टर और एल्गोरिदम के सहारे किया गया, जिससे गरीब, मजदूर, और आदिवासी वर्ग के मताधिकार पर सीधा कुठाराघात हुआ है।
सत्ता के दबाव में फॉर्म-7 का दुरुपयोग
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह महज कोई प्रशासनिक चूक या सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत कांग्रेस समर्थित और गरीब तबके के वोट काटे गए हैं। बिलासपुर के कुछ बूथों का हवाला देते हुए बताया गया कि वहां आपत्ति जताने पर सत्यापन के दौरान सभी मतदाता सही पाए गए, जिन्हें संघर्ष के बाद उनका हक मिला। इसी तरह रायपुर, बिरगांव, बालोद, दुर्ग और बस्तर जैसे जिलों से भी बड़े पैमाने पर जबरिया नाम हटाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सत्ता पक्ष के दबाव में फॉर्म-7 का मनमाना इस्तेमाल किया गया है।
मुख्य मांगें:
लिखित नोटिस की कमी: यदि यह सामान्य प्रक्रिया थी, तो नाम काटने से पहले संबंधित नागरिकों को लिखित में नोटिस क्यों नहीं दिया गया?
सार्वजनिक हो सूची: सरकार में हिम्मत है तो उन 25 लाख लोगों की सूची सार्वजनिक कर बूथवार स्वतंत्र जांच करवाई जाए।
पंचनामा और सत्यापन: बीएलओ घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करें, मौके का पंचनामा तैयार हो और स्थानीय निकाय की सामान्य सभा में अनुमोदन के बाद ही नाम विलोपन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।
कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि जनता अपने संवैधानिक अधिकारों के हनन को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगी और इस सुनियोजित धांधली के खिलाफ जोरदार संघर्ष जारी रखा जाएगा।






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