बस्तर में बदला दौर: गोलियों की गूंज पीछे छूटी, विकास और खुशहाली ने ली जगह - मंत्री गुरु खुशवंत साहेब....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
बीजापुर / रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के मौके पर बीजापुर जिले में उत्साह, उमंग और विकास के एक नए युग का संकल्प साफ तौर पर दिखाई दिया। अपने बीजापुर प्रवास के दौरान, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों से लेकर जिला मुख्यालय के मिनी स्टेडियम तक विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने एक ओर जहां दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद कर क्षेत्र के विकास की रूपरेखा पर चर्चा की।
कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर लहराया तिरंगा, जवानों के साहस को नमन -
राज्योत्सव कार्यक्रम में शामिल होने से पहले, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने बीजापुर के संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर स्थित एफओबी ताड़पाला का दौरा किया। कभी नक्सल हिंसा और आतंक के साये में रहे इस इलाके में पहुंचकर उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों से आत्मीय मुलाकात की।
कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर तिरंगे का शान से फहराना इस क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। जवानों के अदम्य साहस और बलिदान की सराहना करते हुए कहा गया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अपनों से दूर रहकर देश की आंतरिक सुरक्षा संभालने वाले इन प्रहरियों के कारण ही आज बस्तर में शांति के द्वार खुले हैं। राष्ट्र इन वीर जवानों की सेवाओं का हमेशा ऋणी रहेगा।
'श्रमेव जयते': विकास की नींव में पसीना बहाने वाले श्रमिकों का सम्मान -
कर्रेगुट्टा में चल रहे निर्माण कार्यों में जुटे श्रमिक भाई-बहनों को राज्य स्थापना दिवस पर सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत' और 'विकसित बस्तर' के सपने को साकार करने में श्रमिकों की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ बस्तर अब प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें हर एक श्रमिक का परिश्रम अमूल्य है।
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई और बदलता बस्तर -
केन्द्र और राज्य सरकार के मजबूत नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को अभूतपूर्व सफलता मिल रही है। सुरक्षा के साथ-साथ अब सुदूर अंचलों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। बस्तर की असली पहचान अब भय और हिंसा से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटन और युवाओं की प्रतिभा से बन रही है।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर -
कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। आधुनिक युग में केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं के पास रोजगारपरक तकनीकी ज्ञान होना अनिवार्य है। बस्तर के युवाओं को स्थानीय स्तर पर हुनरमंद बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर राज्य के निर्माण में भागीदार बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
संस्कृति, पर्यावरण और जनभागीदारी का संगम -
बीजापुर के मिनी स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय राज्योत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्यों और कला का भव्य प्रदर्शन हुआ। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और बच्चों को शिक्षा के महत्व से जोड़ते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कैंप परिसर में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधरोपण भी किया गया। अंत में, बीजापुर के नागरिकों, युवाओं और सुरक्षा बलों के जवानों को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस की बधाई देते हुए एक विकसित, समृद्ध और शांतिपूर्ण बस्तर के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।






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