google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

मानसिक क्रूरता के आधार पर हाईकोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक का आदेश रखा बरकरार....

13 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

बिलासपुर: न्यायमूर्ति पार्थ प्रीतम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। दोनों का विवाह 17 फरवरी 2016 को हुआ था। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, शादी के बाद वे केवल छह-सात दिन साथ रहे। इसके बाद पति, जो सरकारी कर्मचारी है, नौकरी के सिलसिले में दंतेवाड़ा चला गया और पत्नी नर्सिंग की पढ़ाई के लिए छात्रावास में रहने लगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता के आधार पर पति को दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी स्थायी गुजारा भत्ता पाने के लिए अलग से आवेदन कर सकती है। पारिवारिक न्यायालय में इस संबंध में मांग नहीं किए जाने और जरूरी साक्ष्य पेश नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने अपील के दौरान पहली बार गुजारा भत्ते पर फैसला देने से इनकार कर दिया।


पति ने तलाक की याचिका में पत्नी पर उसके और उसके माता-पिता के साथ बार-बार विवाद करने, मायके चले जाने, दूसरे व्यक्ति से संबंध रखने और उसके विभाग में झूठी शिकायतें करने के आरोप लगाए थे। पत्नी ने इन आरोपों से इनकार किया। उसने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना, चार लाख रुपये मांगने और पिता की जमीन का हिस्सा हस्तांतरित करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया। पत्नी ने पति पर भी दूसरी महिलाओं से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह विवाह जारी रखना चाहती है। अंबिकापुर के पारिवारिक न्यायालय ने 11 नवंबर 2024 को पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी की थी। पत्नी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और स्थायी गुजारा भत्ते की मांग भी की। हाईकोर्ट ने माना कि पति दूसरे व्यक्ति से पत्नी के संबंध होने के आरोप के समर्थन में स्वतंत्र साक्ष्य, कथित फोन रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पेश नहीं कर सका।


हालांकि, सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील ने पति से कथित घटना को लेकर माफी मांगने के संबंध में सवाल किए थे। खंडपीठ ने कहा कि यदि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं होती तो माफी मांगने के बारे में इस तरह का सवाल पूछे जाने का सामान्यतः कोई कारण नहीं होता। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि पत्नी की मां ने उसके समर्थन में हलफनामा दिया था, लेकिन जिरह के लिए गवाही देने नहीं आईं। इन परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए खंडपीठ ने पति के पक्ष को अधिक स्वीकार्य माना और पत्नी के आचरण को इस मामले में मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक बरकरार रखा। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ते की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी ने पारिवारिक न्यायालय में यह मांग नहीं की थी और न ही इसके समर्थन में जरूरी साक्ष्य पेश किए थे। ऐसे में अपीलीय स्तर पर पहली बार उपलब्ध सामग्री के बिना इस दावे पर फैसला करना उचित नहीं होगा। खंडपीठ ने पत्नी की अपील खारिज कर दी, लेकिन उसे धारा 25 के तहत सक्षम अदालत में अलग आवेदन देने की छूट दी। उस आवेदन पर कानून के अनुसार विचार किया जा सकेगा। हाईकोर्ट ने मौजूदा अपील में पत्नी को कोई स्थायी गुजारा भत्ता नहीं दिया है।



Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html