गंभीर बीमारी से जूझ रहे 10 साल के रिमोन के लिए मसीहा बने मुख्यमंत्री, इलाज को मिले 12 लाख...
अन्नदाता पिता की आंखों के आंसू पोंछे, बेटे रिमोन के उपचार के लिए सरकार ने स्वीकृत किए 12 लाख रुपये...
"यह सिर्फ आपका नहीं, हमारा भी बेटा है..." मासूम रिमोन को गोद में लेकर बोले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
एक किसान की बेबसी और पिता का लाचार दिल… जिसकी हर धड़कन अपने बीमार बेटे को बचाने की गुहार लगा रही थी। आंखों में खौफ था कि कहीं वह अपने जिगर के टुकड़े को खो न दे, और जेब में इलाज के लिए लाखों रुपये जुटाने की भारी बेबसी। लेकिन जब यह लाचारी और दर्द राज्य के मुखिया विष्णुदेव साय तक पहुंचा, तो शासन ने बिना देर किए मदद का मजबूत हाथ आगे बढ़ा दिया। महज 10 साल के मासूम रिमोन की जिंदगी बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से 12 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर कर दी है।
यह वाकया तब और भी भावुक हो उठा जब मुख्यमंत्री ने नन्हें रिमोन को अपने आगोश में लेकर दुलारा और उसके माता-पिता को ढांढस बंधाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा— "यह केवल आपका अकेला बेटा नहीं, हमारा भी बेटा है... इसकी सेहत का ख्याल रखना और इसे बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।"
सक्ती जिले के एक दूरदराज गांव में रहने वाले साधारण किसान परिवार के लिए मुख्यमंत्री के ये आत्मीय बोल किसी वरदान से कम साबित नहीं हुए। दुर्लभ बीमारी के जाल में फंसे रिमोन के लिए अब इलाज के रास्ते खुल गए हैं। इस दिल को छू लेने वाले मिलन के दौरान माहौल तब और भावुक हो गया, जब बीमार मासूम ने एक प्यारा सा गीत सुनाकर मुख्यमंत्री के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
एक तरफ बीमारी से जिंदगी की जंग लड़ता छोटा सा बच्चा, दूसरी तरफ इलाज के खर्चे से सहमा हुआ गरीब परिवार... और इन सबके बीच प्रशासनिक संवेदनशीलता ने एक नई उम्मीद की अलख जगा दी है। 'मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना' के तहत मिली इस बड़ी राहत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि तंगहाली और गंभीर बीमारियों के आगे सरकार गरीब के साथ चट्टान बनकर खड़ी है। अब पूरे इलाके की निगाहें इस मासूम पर टिकी हैं, ताकि वह जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने बचपन की उन पुरानी खिलखिलाहटों के साथ वापस लौट सके।






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