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बेमेतरा में खुलेगी प्रदेश की आधुनिक खुली जेल, जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में ऐतिहासिक कदम...

Jul 15
3 min read
  • उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुमोदन के बाद अधिसूचना जारी

  • बंदियों के सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया आयाम

  • खुली जेल में कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और परिवार के साथ बेहतर सामाजिक जुड़ाव की होगी व्यवस्था |


पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-

रायपुर :- छत्तीसगढ़ सरकार ने जेल सुधार एवं बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल करते हुए जिला बेमेतरा के ग्राम पथर्रा में खुली जेल की स्थापना का आदेश जारी कर दिया है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल मंत्री विजय शर्मा के अनुमोदन के पश्चात आज जेल विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि जेल विभाग अपनी मूल अवधारणा के अनुरूप बंदियों के सुधार, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करेगा।


महानिदेशक जेल हिमांशु गुप्ता ने बताया कि बेमेतरा स्थित खुली जेल का मुख्य उद्देश्य बंदियों का पुनः सामाजिक समावेशन, मानवाधिकारों की रक्षा तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। यह पहल भारतीय न्याय व्यवस्था की उस सोच को साकार करेगी, जिसमें सजा के साथ-साथ अपराधी के सुधार और पुनर्वास को भी समान महत्व दिया गया है।


200 बंदियों की क्षमता वाली होगी आधुनिक खुली जेल :-

ग्राम पथर्रा में 10.20 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 200 बंदियों की आवास क्षमता वाली आधुनिक खुली जेल विकसित की गई है। यहां अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ गुणवत्तापूर्ण आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, मनोरंजन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जेल एवं सुरक्षा कर्मियों के लिए भी आवासीय क्वार्टर एवं बैरक की समुचित व्यवस्था की गई है।


चारदीवारी नहीं, विश्वास और जिम्मेदारी के साथ होगा पुनर्वास :-

खुली जेल की अवधारणा के तहत बंदियों को पारंपरिक जेलों की तरह चारदीवारी में बंद नहीं रखा जाएगा, बल्कि सीमित निगरानी में सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा। वे गौशाला, डेयरी, सब्जी उत्पादन, स्क्रीन प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब एवं ट्यूब लाइट निर्माण, फैब्रिकेशन, भवन निर्माण, काष्ठ कला, सिलाई, मुर्गी पालन तथा अन्य कुटीर उद्योगों से जुड़कर रोजगारपरक गतिविधियों में भाग लेंगे। हालांकि उन्हें जेल विभाग द्वारा निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।


अच्छे आचरण वाले आजीवन कारावास के बंदियों को मिलेगा अवसर :-

प्रारंभिक चरण में ऐसे बंदियों को खुली जेल में रखा जाएगा, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है तथा जिन्होंने जेल में उत्कृष्ट आचरण के साथ 11 वर्ष अथवा उससे अधिक की सजा पूरी कर ली है। केवल उन्हीं बंदियों का चयन किया जाएगा, जिन्होंने अनुशासन बनाए रखा हो, जिनके पुनः गंभीर अपराध करने की संभावना न हो तथा जिनकी सामाजिक पृष्ठभूमि सकारात्मक हो। पात्रता का अंतिम निर्णय महानिदेशक जेल की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी।


रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक पुनर्वास का बनेगा केंद्र :-

खुली जेल में बंदियों को मछली पालन, कुक्कुट पालन, पशुपालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन, काष्ठ कला, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सिलाई, बुनाई, बुक बाइंडिंग, प्रिंटिंग तथा कंप्यूटर संचालन सहित अनेक रोजगारपरक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें जीविकोपार्जन के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। रिहाई के बाद स्वरोजगार शुरू करने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत ऋण सुविधा भी प्रदान की जाएगी।


आस्था कैफे और एंपोरियम से जुड़ेगा समाज :-

बेमेतरा-सिमगा मुख्य मार्ग पर जिला प्रशासन के सहयोग से 'आस्था कैफे' और ग्रॉसरी शॉप का संचालन किया जाएगा, जहां बंदी कार्य कर सकेंगे। वहीं खुली जेल परिसर के मुख्य द्वार के समीप स्थापित एंपोरियम में बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय किया जाएगा, जिससे उन्हें आय अर्जित करने के साथ समाज से सकारात्मक जुड़ाव का अवसर मिलेगा।


मानवीय और सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल :-

खुली जेल व्यवस्था से बंदियों को खुले वातावरण में जीवन जीने, परिवार के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने, मानसिक स्वास्थ्य में सुधार तथा जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में पुनः स्थापित होने का अवसर मिलेगा।

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