CGPSC इंटरव्यू स्थगित होने से युवाओं के सवाल और गंभीर हुए, सरकार पारदर्शिता के साथ पूरी स्थिति स्पष्ट करे: कांग्रेस.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा राज्य सेवा परीक्षा-2025 के दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू को अचानक स्थगित किए जाने पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार और पीएससी से इस मामले में पारदर्शिता बरतते हुए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 20 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू को आयोग ने "अपरिहार्य कारण" बताकर टाल दिया है। इस परीक्षा के माध्यम से 20 विभागों में 265 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। ऐन वक्त पर इंटरव्यू स्थगित होने से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के मन में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
1:3 के नियम की अनदेखी और मूल्यांकन पर सवाल -
कांग्रेस ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि 265 पदों के विरुद्ध 1:3 के नियम के तहत 795 अभ्यर्थियों का चयन होना था, लेकिन आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए योग्य माना। 187 अभ्यर्थी कम चुने गए हैं। आयोग का तर्क है कि ये 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अर्हता अंक (66 और 46) प्राप्त नहीं कर सके।
इस पर सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 2024 की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में मूल्यांकन की भारी गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं और अभ्यर्थियों को गलत नंबर दिए गए थे। ऐसे में यदि आयोग का दावा सही है, तो उसे प्रमाणित करने के लिए अभ्यर्थियों की मुख्य परीक्षा की कॉपियां (उत्तर पुस्तिकाएं) इंटरव्यू से पहले उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि अभ्यर्थी अपने अंकों का स्वमूल्यांकन कर संतुष्ट हो सकें।
सरकार और आयोग से मांगे जवाब -
कांग्रेस ने सरकार और CGPSC से स्पष्ट करने की मांग की है कि:-
इंटरव्यू स्थगित करने की वास्तविक वजह क्या है ?
मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग को लेकर उठे सवालों का क्या समाधान निकाला गया है ?
इंटरव्यू की नई तारीखें कब घोषित की जाएंगी ?
अभ्यर्थियों की आशंकाओं को दूर करने के लिए आयोग क्या प्रक्रिया अपनाएगा ?
कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल परीक्षा कराने से नहीं, बल्कि उसके हर चरण में पारदर्शिता रखने से सुनिश्चित होती है। युवाओं के भविष्य को देखते हुए सरकार और आयोग को सभी संबंधित तथ्यों को तुरंत सार्वजनिक करना चाहिए।






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