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शहर को चार क्लस्टर में बांटकर 5,000 से अधिक बीट की होगी दैनिक निगरानी...

Oct 1
3 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-

रायपुर। राजधानी रायपुर को विश्वस्तरीय और चकाचक स्वच्छ शहर बनाने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत शहर की सफाई व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। अब सफाई कर्मचारियों की गिनती के आधार पर नहीं, बल्कि सड़क और मोहल्ले की वास्तविक सफाई (रिजल्ट) के आधार पर ठेका एजेंसियों को भुगतान किया जाएगा। इसके लिए पूरे शहर को 4 क्लस्टरों और 5000 से अधिक बीट में बांटकर स्मार्ट निगरानी की जाएगी।


पीआईबी (पत्र सूचना कार्यालय) रायपुर द्वारा आयोजित एक प्रेसवार्ता में नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने इन नई तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के 'प्रगति-50' (PRAGATI-50) कार्यक्रम के तहत देशभर के 50 शहरों में छत्तीसगढ़ से रायपुर और बिलासपुर का चयन हुआ है। इसका मुख्य लक्ष्य यह है कि शहर में कदम रखते ही बाहर से आने वाले लोगों को स्वच्छता का स्पष्ट अहसास हो।

अब 4 हिस्सों में बंटेगा कचरा -

नए नियमों के मुताबिक, सबसे ज्यादा फोकस कचरे को घरों और संस्थानों (स्रोत) पर ही अलग-अलग करने पर है। अब सिर्फ सूखा और गीला कचरा ही नहीं, बल्कि सैनिटरी वेस्ट (जैसे डायपर, पैड) और विशेष देखभाल वाले कचरे (जैसे फ्यूज बल्ब, बैटरी, पारा थर्मामीटर) को भी अलग-अलग डस्टबिन में रखना होगा। नगर निगम इसके लिए कचरा गाड़ियों में अलग-अलग बॉक्स की व्यवस्था कर रहा है। कचरा छंटने से इसके निपटान और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।


बड़े कचरा उत्पादकों पर होगी सख्ती -

मॉल, हॉस्टल, बड़े आवासीय परिसरों और कमर्शियल संस्थानों की जिम्मेदारी अब और बढ़ा दी गई है। इन परिसरों को अपने गीले कचरे का निपटारा (कम्पोस्टिंग या बायोगैस के जरिए) अपनी बाउंड्री के भीतर ही करना होगा। इसके अलावा, अपशिष्ट जल (वेस्ट वॉटर) को ट्रीट कर बगीचों में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इन सभी प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है जिससे व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता आएगी।

रोजाना अपलोड होंगी 'Before-After' की तस्वीरें -

सफाई का नया 'बीट सिस्टम' काफी सख्त है। हर सड़क, नाले, तालाब और पार्क के एक निश्चित हिस्से को एक 'बीट' माना जाएगा। शहर में ऐसी करीब 5,000 बीट बनेंगी। संबंधित एजेंसी को सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें (Before and After Photos) रोजाना डिजिटल पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। सेंट्रल कंट्रोल रूम से इसकी मॉनिटरिंग होगी। अगर किसी बीट में सफाई नहीं मिली, तो सीधा पेमेंट काट लिया जाएगा।


कचरा गाड़ियों की रियल-टाइम GPS ट्रैकिंग -

डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाली गाड़ियों की लेटलतीफी दूर करने के लिए इनके रूट को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। गाड़ी किस घर के सामने कितने बजे पहुंचेगी, इसका समय तय होगा। अगर गाड़ी लेट होती है या अपना रूट बदलती है, तो सिस्टम में तुरंत अलर्ट (फ्लैग) जनरेट हो जाएगा। आम जनता के लिए भी एक डिजिटल शिकायत प्रणाली बनाई जा रही है, जहां वे अपनी लोकेशन की फोटो डालकर सफाई न होने की शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

सरोना डंप साइट खत्म, नई साइट नहीं बनेगी -

वर्तमान कचरा प्रबंधन पर बात करते हुए संबित मिश्रा ने स्पष्ट किया कि शहर में कचरा प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) की पर्याप्त क्षमता मौजूद है। सरोना के पुराने डंपिंग ग्राउंड को पहले ही वैज्ञानिक तरीके से खत्म (रेमेडिएशन) किया जा चुका है और शहर में कोई नया डंप साइट नहीं बनाया जा रहा है।


अंत में, आयुक्त ने 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान का जिक्र करते हुए रायपुरवासियों से अपील की कि वे कचरा अलग करने को अपनी दैनिक आदत बनाएं। नागरिकों की भागीदारी के बिना शहर को 100% स्वच्छ बनाना संभव नहीं है। इस प्रेसवार्ता के दौरान अपर आयुक्त विनोद पांडे और उपायुक्त जसदेव सिंह बाबरा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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