दिल्ली में 'डिजिटल अरेस्ट' का सनसनीखेज मामला: 18 दिनों तक खौफ में रखकर 75 वर्षीय बुजुर्ग से 30 लाख की लूट....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली। देश की राजधानी में साइबर अपराधियों का एक बेहद खौफनाक और अमानवीय चेहरा सामने आया है। दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में शातिर ठगों ने एक 75 वर्षीय बीमार बुजुर्ग महिला को अपना शिकार बनाते हुए करीब 30 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अपराधियों ने इस महिला को पूरे 18 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर कैद रखा और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
मिली जानकारी के अनुसार, जालसाजों ने खुद को किसी बड़ी सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर बुजुर्ग महिला से संपर्क किया था। उन्होंने फोन पर महिला को गंभीर कानूनी मामलों में फंसाने और गिरफ्तार करने का खौफ दिखाया। इसके बाद लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए उन पर इतना दबाव बनाया गया कि महिला दहशत में आ गईं। ठगों ने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि वे इस कथित 'गुप्त जांच' के बारे में अपने परिवार या किसी अन्य व्यक्ति को न बताएं।
गिरफ्तारी के डर और भारी मानसिक तनाव के साये में जी रही उस बीमार महिला ने अपराधियों के निर्देशों का पालन करते हुए कई किश्तों में लगभग 30 लाख रुपये उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। यह पूरा खौफनाक खेल 18 दिनों तक चलता रहा। अंततः जब परिवार वालों को महिला के व्यवहार और बैंक के बड़े लेनदेन की भनक लगी, तब जाकर इस खौफनाक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।
परिजनों ने तुरंत पुलिस और साइबर क्राइम सेल में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। फिलहाल जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं और आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंक के ट्रांजैक्शन डिटेल्स, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य डिजिटल सुराग खंगाल रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसे किन खातों में गए और इस बड़े नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट? (जनहित में जानकारी)
यह साइबर ठगी का एक नया और खतरनाक पैंतरा है। इसमें जालसाज खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अफसर बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर लेते हैं। उन्हें डराया जाता है कि वे किसी बड़े अपराध में शामिल पाए गए हैं और उन्हें तब तक कैमरे के सामने (यानी डिजिटल रूप से कैद) रहना होगा, जब तक कि कथित जांच पूरी नहीं हो जाती। इसी डर और बदनामी का फायदा उठाकर पीड़ितों से मोटी रकम वसूली जाती है।






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