PMGSY: ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आंकड़ों से ज्यादा 'गुणवत्ता' पर जोर.....

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नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अगले चरण में केवल सड़क निर्माण के आंकड़ों पर ध्यान देने के बजाय ‘गुणवत्तापूर्ण कनेक्टिविटी’ सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उन्होंने अधिकारियों और इंजीनियरों से कहा कि योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सड़कें टिकाऊ, उपयोगी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हों।
सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार-मंथन कार्यशाला को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और इंजीनियरों से कहा कि इस आयोजन को केवल औपचारिक रस्म बनाकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। कार्यशाला से ऐसे ठोस सुझाव और समाधान सामने आने चाहिए, जिन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का अगला चरण सामान्य निर्माण गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके केंद्र में ‘गुणवत्तापूर्ण कनेक्टिविटी’ होनी चाहिए। इसका मतलब केवल गांव तक सड़क पहुंचाना नहीं, बल्कि ऐसी सड़क व्यवस्था विकसित करना है जो लंबे समय तक लोगों के लिए उपयोगी साबित हो और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।
चौहान ने अधिकारियों और इंजीनियरों से जमीनी स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर खुलकर विचार करने को कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली समस्याओं को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इनके लिए नए, व्यावहारिक और प्रभावी समाधान खोजे जाने चाहिए।दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार-मंथन कार्यशाला का उद्देश्य भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन से जुड़े अनुभवों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा करना है। इसमें अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच उन उपायों पर मंथन किया जा रहा है, जिनके जरिए ग्रामीण सड़क नेटवर्क की गुणवत्ता और उपयोगिता को बेहतर बनाया जा सके।
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में संकेत दिया कि अब योजना को अगले स्तर पर ले जाने की जरूरत है। इसके लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि कितने किलोमीटर सड़क बनाई गई या कितने गांवों को जोड़ा गया। सड़क की गुणवत्ता कैसी है, उसका रखरखाव किस तरह किया जा रहा है और वह स्थानीय लोगों की जरूरतों को कितनी अच्छी तरह पूरा कर रही है, इन पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। कहीं भारी बारिश होती है तो कहीं पहाड़ी या कठिन भूभाग निर्माण के लिए चुनौती बनता है। ऐसे में एक ही प्रकार की निर्माण पद्धति हर क्षेत्र के लिए प्रभावी नहीं हो सकती। इसी वजह से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी समाधान और निर्माण पद्धतियों पर विचार करना महत्वपूर्ण हो जाता है।केंद्रीय मंत्री ने कार्यशाला में शामिल अधिकारियों और इंजीनियरों से अपने अनुभवों के आधार पर ऐसे सुझाव देने का आह्वान किया, जिन्हें वास्तविक परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि विचार-मंथन का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि समस्याओं की पहचान करके उनके व्यावहारिक समाधान तक पहुंचना होना चाहिए।
‘गुणवत्तापूर्ण कनेक्टिविटी’ की अवधारणा ग्रामीण सड़क व्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क बनने के बाद उसके लंबे समय तक उपयोग योग्य बने रहने की जरूरत होती है। खराब गुणवत्ता वाली सड़कें जल्दी क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीण लोगों को फिर से आवागमन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए निर्माण के साथ गुणवत्ता और टिकाऊपन पर ध्यान देना आवश्यक है। ग्रामीण सड़क संपर्क का सीधा संबंध आर्थिक गतिविधियों से भी है। किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज जाने तथा मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में अच्छी सड़कों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। बेहतर सड़क संपर्क से गांवों और कस्बों के बीच आवाजाही आसान होती है और रोजगार तथा व्यापार की संभावनाओं को भी समर्थन मिलता है।कार्यशाला में भविष्य की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार किया जा रहा है।
इसके साथ ही योजना के अगले चरण में गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की दिशा में भी मंथन किया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान का संदेश स्पष्ट रहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को केवल निर्माण परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका लक्ष्य ग्रामीण लोगों को भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण सड़क संपर्क उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और इंजीनियरों से कार्यशाला में होने वाली चर्चा को वास्तविक बदलाव का आधार बनाने और जमीनी समस्याओं के नए समाधान तलाशने का आग्रह किया।दो दिवसीय इस राष्ट्रीय कार्यशाला से निकलने वाले सुझाव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के भविष्य के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार का जोर अब सड़क बनाने के साथ उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता और टिकाऊपन सुनिश्चित करने पर है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को मिलने वाली कनेक्टिविटी का लाभ लंबे समय तक लोगों तक पहुंच सके।






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