जीएसटी सुधार के एक साल: कांग्रेस का आरोप- 'जनता की जेब खाली, सिंडिकेट की तिजोरी भारी'....
राहत और रियायत ग्राहकों तक पहुंची ही नहीं, सत्ता प्रायोजित महंगाई और मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ गई...
राहत और रियायत ग्राहकों तक पहुंची ही नहीं, सत्ता प्रायोजित महंगाई और मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ गई...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: - जीएसटी दरों में कटौती और सुधार की घोषणा के एक साल पूरे होने पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जीएसटी में छूट का वास्तविक फायदा आम ग्राहकों तक नहीं पहुंचा, बल्कि यह राहत सत्ता प्रायोजित महंगाई और मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ गई है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने बयान जारी कर कहा कि ठीक एक साल पहले, 22 सितंबर 2025 को जीएसटी दरों में कटौती कर आम आदमी को बड़ी राहत देने का दावा किया गया था। लेकिन, जमीनी हकीकत सरकारी विज्ञापनों के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि आज दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम 22 सितंबर 2025 की तुलना में कहीं अधिक हैं, जिससे साफ होता है कि सरकार ने जीएसटी सुधार के नाम पर जनता को केवल छला है।
निगरानी तंत्र का अभाव और मुनाफाखोरी का आरोप -
वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्लैब कम करने और टैक्स में कटौती के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण इसका लाभ आम उपभोक्ता तक नहीं पहुँच सका। राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग और खाद्य विभाग की ओर से कोई 'एंटी-प्रोफिटियरिंग' (मुनाफाखोरी विरोधी) निगरानी तंत्र या विशेष फ्लाइंग स्क्वाड गठित नहीं किया गया। इसी का नतीजा है कि कीमतें कम होने के बजाय मुनाफाखोरों की जेबें भर रही हैं और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर टैक्स राहत केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गई है।
'आम जनता के साथ हो रही संगठित आर्थिक ठगी' -
मुख्य प्रवक्ता ने इसे आम जनता के साथ ‘संगठित आर्थिक ठगी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और बड़े सिंडिकेट की साठगांठ के कारण बेलगाम महंगाई ने आम नागरिक की रसोई और बजट को पूरी तरह तबाह कर दिया है। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल किया कि जीएसटी राहत के विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये उड़ाए गए, लेकिन उस कथित राहत का लाभ छत्तीसगढ़ के किस उपभोक्ता को मिला?
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि सरकार की सरपरस्ती में मुनाफाखोर और बिचौलिए फायदा उठा रहे हैं, जबकि असल ग्राहक आज भी ठगा जा रहा है।






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