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बीमा क्लेम अटकाने पर राष्ट्रीय आयोग सख्त, कंपनी को 20 लाख और ब्याज चुकाने का आदेश....

3 days ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

कबीरधाम जिले की एक विधवा महिला के लिए न्याय की लंबी और कठिन राह आखिरकार सुखद परिणाम पर आकर रुकी है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को चार हफ्ते के भीतर 20 लाख रुपये की राशि और उस पर छह फीसदी वार्षिक ब्याज देने का सख्त निर्देश दिया है।


यह पूरा मामला बोड़ला तहसील के माराडबरा गांव की रहने वाली तिहारो चिचाम से जुड़ा है। उनके पति गणेश चिचाम का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बोड़ला शाखा में अकाउंट था। बैंक के मार्फत सिर्फ एक हजार रुपये का सालाना प्रीमियम भरकर पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी, जिसके तहत सड़क दुर्घटना में मौत होने पर 20 लाख रुपये का प्रावधान तय किया गया था।


सड़क हादसे में गई थी जान -

19 नवंबर 2023 की शाम गणेश चिचाम अपनी बाइक से तरेगांव जंगल से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में मछलीरवां मंदिर के पास एक सड़क हादसे में उनकी जान चली गई। हादसे के बाद जब पीड़ित पत्नी ने बीमा कंपनी के सामने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो कंपनी ने कागजी खानापूर्ति और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट का बहाना बनाकर भुगतान करने से साफ इनकार कर दिया।


निचले स्तर के आयोगों से भी नहीं मिली थी राहत -

बीमा कंपनी के रवैये से आहत होकर महिला ने कबीरधाम जिला उपभोक्ता आयोग में न्याय की गुहार लगाई, लेकिन वहां से उसे मायूसी हाथ लगी। इसके बाद मामला अपील के जरिए राज्य उपभोक्ता आयोग तक गया, मगर वहां भी फैसला महिला के हक में नहीं आया। हार न मानते हुए उन्होंने वकील राजेश कुमार भावनानी की मदद से नेशनल कमीशन (राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया।


राष्ट्रीय आयोग की कड़ी फटकार -

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालतों और बीमा कंपनी के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने साफ किया कि केवल पुलिस की खात्मा रिपोर्ट या बिना ठोस सबूत के लापरवाही का आरोप लगाकर किसी का वैध बीमा दावा नहीं ठुकराया जा सकता। इसके अलावा, बिसरा रिपोर्ट (रासायनिक परीक्षण) में भी किसी जहरीले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं हुई थी। इन सभी पहलुओं को आधार बनाते हुए राष्ट्रीय आयोग ने जिला और राज्य आयोग के पुराने आदेशों को पलट दिया और बीमा कंपनी को तय समयसीमा के भीतर मुआवजा देने का हुक्म सुनाया।

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