ग्लोबल ड्रग कार्टेल पर बड़ा प्रहार: तुर्की में ‘नवाब विर्क’ बनकर छुपा बैठा कुख्यात तस्कर नवप्रीत सिंह भारत के हवाले....

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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के सिंडिकेट के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। दुनिया के अलग-अलग कोनों में छुपकर भारत विरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने वाले अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए, कुख्यात नारको-तस्कर नवप्रीत सिंह को तुर्की से सफलतापूर्वक डिपोर्ट कर भारत लाया गया है। स्वदेश पहुंचते ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस बड़ी कामयाबी की जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में पनाह लेने वाले ड्रग माफियाओं के खिलाफ भारत का यह अभियान अब और अधिक आक्रामक हो चुका है।
तुर्की की नागरिकता और बदली पहचान का पर्दाफाश -
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नवप्रीत सिंह तुर्की में छिपे रहने के दौरान अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। वह वहां खुद को ‘नवाब विर्क’ के तौर पर पेश कर रहा था और उसने स्थानीय नागरिकता भी हासिल कर ली थी। इसके बावजूद, भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के मजबूत समन्वय के आगे उसकी चालबाजी फेल हो गई। अधिकारियों का मानना है कि प्रत्यर्पण और कूटनीतिक चैनलों के जरिए उसकी वापसी से इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की कई और परतें उघड़ेंगी।
एजेंसियों का अगला लक्ष्य: नेटवर्क का पूरा सफाया -
सुरक्षा जानकारों के मुताबिक, इस स्तर के तस्करों की गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत भर होती है। अब केंद्रीय एजेंसियों का मुख्य फोकस नवप्रीत सिंह के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने पर है। पूछताछ के दौरान इस बात की गहराई से पड़ताल की जाएगी कि विदेशों में उसके वित्तपोषण (फंडिंग) और साजो-सामान का प्रबंधन कौन कर रहा था। इसके साथ ही, भारत के भीतर उसके पुराने संपर्कों और लोकल हवाला चैनलों की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके।
विदेशों में छिपे भगोड़ों पर कसता शिकंजा -
भारत सरकार ने सीमा पार के संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रखी है। इसी का परिणाम है कि पिछले कुछ महीनों में कई बड़े वांछित अपराधियों को अलग-अलग देशों से देश वापस लाया गया है। चाहे वह यूएई से वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी हो या फिर इस साल अप्रैल में तुर्की से मोहम्मद सलीम डोला को शिकंजे में कसना, यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय एजेंसियां इंटरपोल और विदेशी समकक्षों के साथ मिलकर हर उस ठिकाने तक पहुंच रही हैं जहां अपराधी खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।
मंत्रालय के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों भगोड़ों को दुनिया भर के विभिन्न देशों से सफलतापूर्वक भारत लाया जा चुका है। बहरहाल, नवप्रीत सिंह की इस नाटकीय वापसी के बाद अब कानूनी शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।






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