महात्मा गांधी की 157वीं जयंती: राहुल गांधी- सच्चाई और अहिंसा के साथ खड़े रहना ही असली ताकत....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश को यह सिखाया कि अन्याय के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए। महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके सत्य, अहिंसा, निडरता, सद्भाव और न्याय के संदेश को याद किया। सच्चाई तथा अहिंसा के साथ मजबूती से खड़े रहना ही असली ताकत है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बापू को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मौजूदा समय में उनके बताए मूल्यों पर अडिग रहना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
राहुल गांधी ने गांधी जयंती पर अपने संदेश में कहा कि सत्य, अहिंसा और निडरता महात्मा गांधी की सबसे बड़ी विरासत हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने हमें यह समझाया कि अन्याय के सामने झुकना कमजोरी है, जबकि सच और अहिंसा के रास्ते पर डटे रहना वास्तविक शक्ति का प्रतीक है। राहुल गांधी ने कहा कि बापू के विचार केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं थे, बल्कि आज भी समाज और देश के सामने आने वाली चुनौतियों के बीच उनका महत्व बना हुआ है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी महात्मा गांधी को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने सत्य को शक्ति दी, अहिंसा को साहस दिया और सत्याग्रह को अन्याय के खिलाफ एक प्रभावी हथियार बनाया। खड़गे ने कहा कि गांधीजी ने न केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का मार्गदर्शन किया, बल्कि पूरी दुनिया को मानवता, करुणा और शांति का रास्ता भी दिखाया। खड़गे ने अपने संदेश में कहा कि आज जब गांधीजी के विचारों और मूल्यों के सामने नई चुनौतियां दिखाई दे रही हैं, तब सत्य, अहिंसा, सद्भाव और न्याय के सिद्धांतों पर दृढ़ रहना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने देशवासियों को गांधी जयंती की शुभकामनाएं देते हुए महात्मा गांधी के योगदान को याद किया।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इस अवसर पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे नई दिल्ली स्थित राजघाट भी पहुंचे। दोनों नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और सर्वधर्म प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। गांधी जयंती के मौके पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के बीच राजघाट पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और महात्मा गांधी को याद किया। सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के आधार पर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे कई बड़े जनआंदोलनों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक समानता, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सद्भाव पर भी जोर दिया।
गांधीजी का मानना था कि हिंसा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा को संघर्ष का माध्यम बनाया और इसके जरिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी तैयार की। उनके विचारों का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के कई नागरिक अधिकार आंदोलनों और सामाजिक संघर्षों पर भी पड़ा। कांग्रेस ने गांधी जयंती के मौके पर उनके विचारों को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ते हुए याद किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि सामाजिक सद्भाव, लोकतांत्रिक मूल्यों, न्याय और समानता के लिए गांधीजी की सोच आज भी प्रासंगिक है। पार्टी की ओर से विभिन्न राज्यों और जिलों में भी गांधी जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बापू को श्रद्धांजलि दी।
राजनीति राहुल गांधी के संदेश में विशेष रूप से अन्याय के खिलाफ खड़े होने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जीवन यह बताता है कि किसी भी संघर्ष में सच्चाई और नैतिक साहस महत्वपूर्ण होते हैं। उनके अनुसार, अहिंसा को कमजोरी नहीं बल्कि बड़ी ताकत के रूप में समझना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी गांधीजी के विचारों को मानवता और शांति के संदेश से जोड़ा। उन्होंने कहा कि बापू ने जिस रास्ते का अनुसरण किया, उसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को जनआंदोलन का रूप दिया और आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा दी। गांधी जयंती के अवसर पर देश के अन्य शीर्ष नेताओं ने भी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बापू के शांति और अहिंसा के संदेश को याद किया।
राष्ट्रपति ने वैश्विक संघर्षों के बीच गांधीजी के शांति संदेश की प्रासंगिकता पर जोर दिया, जबकि प्रधानमंत्री ने उनके जीवन और आदर्शों को मानवता के लिए मार्गदर्शक बताया। 2 अक्टूबर को देशभर में गांधी जयंती के साथ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई गई। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने शास्त्री को भी श्रद्धांजलि देते हुए उनके सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के जीवन को याद किया। उन्होंने शास्त्री के योगदान और ‘जय जवान, जय किसान’ के संदेश का उल्लेख किया। गांधी जयंती पर कांग्रेस का संदेश मुख्य रूप से सत्य, अहिंसा, न्याय और निडरता के मूल्यों पर केंद्रित रहा। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संदेशों के जरिए कहा कि महात्मा गांधी की विरासत को केवल याद करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके बताए मूल्यों को सार्वजनिक जीवन और समाज में अपनाना भी जरूरी है।






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