महासमुंद बना सर्वाधिक धान खरीदने वाला जिला....

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महासमुंद:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा का मूल भाव किसानों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचाना रहा है। इसी सेवा भावना को छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसान हितैषी नीतियों और सुशासन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में पिछल वर्ष महासमुंद जिले में किसानों को उनकी उपज के विक्रय के लिए व्यवस्थित, सुगम और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ ही उपार्जित धान के सुरक्षित एवं समयबद्ध प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जिससे राज्य में सर्वाधिक धान खरीदने वाला जिला के रूप में पहचान बनी।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में शासन के निर्देशानुसार महासमुंद जिले में धान उपार्जन व्यवस्था को प्रभावी एवं सुचारू रूप से संचालित करने के लिए खाद्य विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। जिले में कुल 1,60,118 किसान पंजीकृत थे। इनमें से 1,49,759 किसानों ने अपना धान विक्रय किया, जो कुल पंजीकृत किसानों का 93.53 प्रतिशत है। किसानों को उनके क्षेत्र के नजदीक धान विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले में 182 धान उपार्जन केन्द्रों का संचालन किया गया। सभी उपार्जन केन्द्रों को फाइनलाइज्ड करते हुए उपार्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया। इन केन्द्रों के माध्यम से कुल 10,19,568.12 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई।
धान खरीदी के बाद उसके सुरक्षित भंडारण और समयबद्ध उठाव को लेकर भी विभाग द्वारा प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई। उपार्जन प्रक्रिया के बाद समितियों द्वारा 10,13,782.07 मीट्रिक टन धान का उठा/निराकरण किया गया, जो कुल खरीदी का 99.43 प्रतिशत है। इससे उपार्जित धान के सुरक्षित एवं समयबद्ध प्रबंधन में महत्वपूर्ण सफलता मिली। इसी क्रम में जिले में सीएमआर के निर्धारित 5,41,421.91 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 2,05,677.89 मीट्रिक टन चावल जमा किया गया। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए जिले में 05 धान संग्रहण केन्द्र भी उपलब्ध रहे।
शासन की किसान हितैषी नीतियों का लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। जिला खाद्य शाखा की रिपोर्ट के अनुसार महासमुंद जिले में 5 एकड़ तक के कुल 26,352 से अधिक किसानों को धान बोनस राशि का लाभ मिल रहा है। इनमें 1 से 2.5 एकड़ तक के लगभग 14,046 सीमांत किसान पंजीकृत हैं, जिनका कुल रकबा 7,169 हेक्टेयर से अधिक है। वहीं 2.5 से 5 एकड़ तक के लगभग 12,306 लघु किसान पंजीकृत हैं। इस प्रकार छोटे और सीमांत किसानों को मिलने वाली बोनस राशि खेती की लागत, घरेलू जरूरतों और कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायक बन रही है। किसानों के लिए यह व्यवस्था धान की खरीदी से लेकर उपज का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, उपार्जन केन्द्रों तक आसान पहुंच और खरीदी के बाद धान के सुरक्षित प्रबंधन को भी सुनिश्चित किया गया है।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में भी किसानों को और बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खाद्य विभाग द्वारा समयबद्ध तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। नई व्यवस्था के अंतर्गत 19,000 गार्डन के लक्ष्य के विरुद्ध 5,036 गार्डन प्राप्त हुए हैं। इसी तरह सितंबर तक पीडीएस बारदाना के लिए निर्धारित 2,006 गार्डन के विरुद्ध 751 गार्डन प्राप्त किए जा चुके हैं। किसानों को अपने क्षेत्र के नजदीक धान विक्रय की सुविधा मिल सके, इसके लिए खरीफ वर्ष 2026-27 में 20 नवीन धान उपार्जन केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें महासमुंद में 2, बागबाहरा में 5, पिथौरा में 1, बसना में 11 और सरायपाली में 1 नवीन केन्द्र शामिल हैं।






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