भारत के बंदरगाह क्षेत्र में बड़ा विस्तार, कार्गो क्षमता दोगुनी के करीब...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली: भारत के बंदरगाह क्षेत्र (Ports Sector) में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। सरकार लगातार बुनियादी ढांचे के विकास, नई तकनीकों के इस्तेमाल और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश की कार्गो हैंडलिंग क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
चूँकि भारत के कुल व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है, इसलिए बंदरगाहों की कार्यकुशलता सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था, आयात-निर्यात और औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित करती है।
क्षमता में रिकॉर्ड विस्तार केंद्रीय पोत परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख बंदरगाहों की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता साल 2014 के लगभग 87.3 करोड़ टन से बढ़कर 2026 में करीब 172.6 करोड़ टन हो गई है। इसी अवधि में वास्तविक माल ढुलाई भी 58.1 करोड़ टन से बढ़कर लगभग 91.5 करोड़ टन पर पहुँच गई है। नए कार्गो टर्मिनलों और आधुनिक उपकरणों के आने से लोडिंग-अनलोडिंग की प्रक्रिया भी काफी तेज हुई है।
लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियाँ बंदरगाहों की क्षमता बढ़ने के बावजूद, जमीन पर माल परिवहन (Freight Transport) और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में अभी भी कई अड़चनें बनी हुई हैं।
सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता: बड़ी मात्रा में कंटेनरों की ढुलाई ट्रकों से होने के कारण बंदरगाहों के आसपास भारी ट्रैफिक और गाड़ियों की भीड़ बढ़ जाती है।
मजबूत रेल संपर्क की जरूरत: विशेषज्ञों का मानना है कि बंदरगाहों पर माल उतारने के साथ-साथ उसे कारखानों और गोदामों तक तेजी से पहुँचाने के लिए पर्याप्त रेलगाड़ियों और समर्पित मालवाहक गलियारों (Dedicated Freight Corridors) का होना बेहद जरूरी है, अन्यथा पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है।
सरकार की पहल और भविष्य की राह सरकार की महत्वाकांक्षी सागरमाला परियोजना के जरिए बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और तटीय क्षेत्रों के विकास पर तेजी से काम चल रहा है। इसके साथ ही, परिवहन के वैकल्पिक साधन के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों (Inland Waterways) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
पोर्ट्स के कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए कार्गो ट्रैकिंग और डिजिटल दस्तावेजों जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (2023) में भारत 38वें स्थान पर रहा था, जो सुधार के संकेत तो देता है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा में चीन और सिंगापुर जैसे देशों की बराबरी करने के लिए अभी सड़क, रेल, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स पार्कों में और अधिक निवेश की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, बंदरगाहों की बढ़ती रफ्तार भारत के समुद्री क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि है, बशर्ते माल परिवहन से जुड़ी जमीनी बाधाओं को जल्द दूर कर लिया जाए। #India #PortsSector #CargoHandling #SagarmalaProject #Logistics #MaritimeIndia #Infrastructure #ImportExport #BreakingADNNews






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