लोरमी में भाई अरुण साव ने हजारों बहनों-माताओं संग मनाया तीजा तिहार, स्नेह और आशीर्वाद का हुआ संगम...
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लोरमी तीज महोत्सव में सपत्नीक महादेव की पूजा-अर्चना कर बहनों की खुशहाली की कामना की...
"हमर अरुण भैया हा दिलदार हैवे ना, बहिनी मन ले ओला मया-दुलार हैवे ना" गीत से गूंजा लोरमी मानस मंच....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
लोरमी। स्थानीय विधायक एवं छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने रविवार को लोरमी के मानस मंच में हजारों माताओं और बहनों के साथ प्रदेश का पारंपरिक 'तीजा तिहार' बेहद धूमधाम और आत्मीयता के साथ मनाया।
लोरमी के भाइयों की ओर से आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में पहुंचीं हजारों बहनों ने अपने भाई अरुण साव को अपार स्नेह और आशीर्वाद दिया। इस दौरान "हमर अरुण भैया हा दिलदार हैवे ना, बहिनी मन ले ओला मया-दुलार हैवे ना" जैसे लोकगीतों से पूरा मानस मंच गूंज उठा।
सपत्नीक की महादेव की पूजा, बहनों की खुशहाली की कामना -
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महादेव की विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपनी पत्नी और क्षेत्र की बहनों के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना की और सबका आशीर्वाद लिया। साव ने कार्यक्रम में पधारीं सभी बहनों का प्रणाम कर स्वागत किया और आमंत्रण स्वीकार करने के लिए उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कामना करते हुए कहा कि लोरमी की सभी बहनों का घर-आंगन धन-धान्य, सुख और समृद्धि से भरा रहे।
तीजा है छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पारिवारिक जुड़ाव का पर्व -
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक त्योहार है। माताएं-बहनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए मायके आकर निर्जला व्रत रखती हैं। मायके में उन्हें भाइयों का दुलार और बचपन की सहेलियों का साथ मिलता है, जिससे पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि तीजा तिहार इसी अपनेपन, प्रेम और पारिवारिक जुड़ाव का पावन पर्व है।
लोकगीतों पर झूमीं बहनें, दिखी छतीसगढ़ी संस्कृति की छटा -
तीजा तिहार के इस भव्य आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने चार चांद लगा दिए। प्रदेश की प्रसिद्ध लोकगायिका गरिमा दिवाकर, स्वर्णा दिवाकर और उनकी 'अंजोर' टीम ने शानदार प्रस्तुतियां दीं। 'तीजा पोरा आगे भाग हमर खुलगे' और 'तरी हरि नाना' जैसे पारंपरिक लोकगीतों ने वहां मौजूद सभी बहनों का मन मोह लिया। पूरे आयोजन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपरा और भाई-बहन के अटूट प्रेम की अद्भुत झलक देखने को मिली।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)











Comments