छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचारी अधिकारी लोगों का ही कर रही प्रशासनिक सर्जरी...
जो भी प्रशासनिक सर्जरी हो रहा है वह मंत्रालय कलेक्टर एवं तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व।

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
जांजगीर चांपा :- वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की जो सरकार बनाकर शासन कर रही है इसके अंतर्गत जितने भी प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी है मंत्रालय के कर्मचारी, जिले के कर्मचारी, जिला कलेक्टर, जिले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, नायक तहसीलदार एवं सारे विभाग में जितने भी प्रशासनिक स्तर के कर्मचारी हैं अधिकारी है किसी न किसी मामले में भ्रष्टाचार के केस में अपराध दर्ज हो चुका है और उनके खिलाफ चार्ज शीट भी बन चुकी है मगर ऐसी विडंबना है कि जितने भ्रष्टाचारी अधिकारी कर्मचारी हैं सभी की प्रशासनिक सर्जरी कर रहा है इसका मतलब यह है एक स्थान से दूसरे स्थान इन लोगों को ट्रांसफर कर रहा है प्रमोशन कर रहा है।
रिश्वत के मामले में एवं अपराधिक प्रकरण में जिनके नाम से पुलिस थाने में प्राथमिक की दर्ज हो गई है और उनको खुला संरक्षण देकर उनको रिश्वत की कमाई को और अधिक बढ़ावा दे रही है और साथ ही साथ उनको खुले रूप में संरक्षण देकर स्वतंत्र कार्यपालिका व्यवस्थापिका में कार्य करने का पावर दे रखा है।
और यही अधिकारी कर्मचारी जितने भी विभाग में कार्यरत हैं सभी लोग बुलंद आवाज के साथ कार्य कर रहे हैं एंटी करप्शन ब्यूरो सीबीआई, सीआईडी एवं अन्य जांच एजेंसी नाम मात्र की जांच एजेंसी है जो की सरकार के इशारे पर काम कर रही है और ऐसे अधिकारियों को प्रोत्साहन देकर पद में रखा है।
जबकि नियम तो यह कहता है कि भ्रष्टाचारी रिश्वतखोरी एवं अन्य अपराध के अपराधी प्रकरण वाले अधिकारी कर्मचारी को जिनके खिलाफ में किसी भी थाने में किसी भी जांच एजेंसी में चार्ज शीट बन जाता है तो उसे तत्काल सेवा से पृथक करने का आदेश है बर्खास्त करने का आदेश है मगर मात्र सस्पेंड कर दिया जाता है सस्पेंड करने के बाद उनका 6 महीने के बाद में बहस कर देता है।
जब यह मामला हाई कोर्ट जाता है सुप्रीम कोर्ट जाता है वहां पर शासन अपना पक्ष मजबूत नहीं रख सकता क्योंकि न्यायालय के पास पूरी ताकत है भले ही फैसला 8 साल के बाद होता है मगर रिश्वतखोरी अधिकारी कर्मचारी को कोर्ट कभी नहीं छोड़ना उसे सजा देकर जेल अंदर कर देता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट का जब हथोड़ा चलता है | उसके सामने में एक हथौड़ी भी टूट जाता है मगर अपराधी को सजा हो जाती है | मगर आज उस अपराधी प्रकरण वाले अधिकारी कर्मचारी को ट्रांसफर प्रमोशन देकर पद में क्यों रखा रहता है |
क्या यही प्रशासनिक सर्जरी है क्या की अपराधिक प्रकरण वाले अधिकारी कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरा स्थान कर दिया जाता है | और यह कहा जाता है कि हमने अधिकारी के खिलाफ में चार्ज सीट का आयरकर न्यायालय में अभियोग लगा दिया है मगर न्यायालय की फैसला आएगी उसको माना जाएगा बोलकर प्रशासनिक पद पर उसको बरकरार रख देता है।
हमारे संवाददाता कहते हैं कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ऐसा देखा जा रहा है की रिश्वतखोरी भ्रष्टाचारी बलात्कारी एवं अन्य आपराधिक प्रवृत्ति के अधिकारी जिनके खिलाफ में पुलिस थाना में प्राथमिक की दर्ज रहती है | उन अधिकारियों कर्मचारियों को केवल लाइन अटैच पद्धति के अनुसार रखा जाता है |
एवं निलंबन करके जग की ऐसा कानून में प्रावधान है कि किसी भी अपराध में कोई भी व्यक्ति के नाम से किसी भी थाने में प्राथमिक की दर्ज रहती है तो उसको तत्काल सेवा से पृथक करने का प्रावधान है | मगर आजकल के कानून व्यवस्था कानून के रखवाले ही कानून के भक्षक हो गए हैं आजकल के अधिकारी कर्मचारी केवल राजनेताओं के इशारे पर काम करते हैं ऐसा कहा जा सकता है।
शालिनी न्यूज़ एजेंसी
संवाददाता राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़।






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