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न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला...

Aug 3
1 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

बिलासपुर :- हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। 72 वर्षीय बुजुर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि शोकसभा आयोजित करना सम्मानजनक परंपरा है, लेकिन इसके नाम पर पूरे दिन अदालत की कार्यवाही स्थगित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय तक निर्बाध पहुंच संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का अभिन्न हिस्सा है।


मामला किराया नियंत्रक न्यायालय से जुड़ा है, जहां 2 फरवरी 2026 को शोकसभा का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी या अधिवक्ता के निधन पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित करना गरिमामय और सम्मानजनक परंपरा है, लेकिन इसके कारण पूरे दिन न्यायिक कार्य पूरी तरह बंद कर देना उचित नहीं माना जा सकता।


कोर्ट ने कहा कि न्यायिक संस्थानों का दायित्व है कि वे न्यायिक कार्य और संवेदनशील परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखें, ताकि आम नागरिकों को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी न हो। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्याय तक निर्बाध पहुंच संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में केवल शोकसभा के आधार पर पूरे दिन की सुनवाई स्थगित करना न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।


हाईकोर्ट ने शोकसभा के कारण सुनवाई टालने वाले 2 फरवरी 2026 के किराया नियंत्रक के आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह के मामलों में न्यायिक कार्य प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए।

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