लोको पायलटों को हाई कोर्ट से झटका: प्रमोशन के बाद तबादले पर अंतरिम राहत देने से इनकार....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
बिलासपुर। पदोन्नति के बाद दूरस्थ स्टेशनों पर किए गए तबादले को रेलवे के नियमों के खिलाफ बताने वाले लोको पायलटों को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की युगलपीठ ने मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट जबलपुर के आदेश को बरकरार रखा है।
मामले में आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के विभागीय सचिव मोहम्मद शमीम के अलावा अजय कुमार मौर्य और जितेंद्र कुमार ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने तबादला प्रक्रिया को लेकर रेलवे की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों और वरिष्ठता के सिद्धांत के विपरीत बताया था।
पदोन्नति के बाद वरिष्ठ कर्मचारियों को दूरस्थ स्टेशनों पर भेजने का आरोप
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक 4 दिसंबर 2025 को सहायक लोको पायलट से लोको पायलट गुड्स के पद पर पदोन्नति के बाद वरिष्ठ कर्मचारियों का तबादला दूरस्थ स्थानों पर कर दिया गया। वहीं आरोप था कि उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों को अपेक्षाकृत नजदीकी स्टेशनों पर पदस्थ रखा गया।याचिकाकर्ताओं ने इसी आधार पर तबादला नीति में वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन नहीं होने का आरोप लगाया और पूरी प्रक्रिया को मनमाना तथा नियमों के विपरीत बताया।
रेलवे ने प्रशासनिक जरूरत को बताया तबादले की वजह
मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से कहा गया कि संबंधित कर्मचारियों के तबादले सामान्य प्रशासनिक आवश्यकता के तहत किए गए हैं। रेलवे का यह भी तर्क था कि पदोन्नति के समय कर्मचारियों को उसी स्टेशन पर समायोजित किया जा चुका था और बाद में किए गए सामान्य तबादले को पदोन्नति संबंधी परिपत्र का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने रेलवे के इस तर्क को प्रथमदृष्टया स्वीकार किया। अदालत ने कहा कि पदोन्नति के समय कर्मचारियों का उसी स्टेशन पर समायोजन किया जा चुका था, इसलिए बाद में किए गए सामान्य तबादले को संबंधित परिपत्र का उल्लंघन मानने का प्रथमदृष्टया आधार नहीं बनता।
हाई कोर्ट ने CAT को जल्द फैसला लेने का दिया निर्देश
युगलपीठ ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कैट जबलपुर के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि अदालत ने कैट को निर्देश दिया कि वह दोनों पक्षों को सुनने के बाद मूल आवेदन का जल्द निपटारा करे। इस तरह फिलहाल लोको पायलटों की तबादले से जुड़ी मांग पर हाई कोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। मामले में अंतिम निर्णय अब कैट जबलपुर की आगे की सुनवाई और आदेश पर निर्भर रहेगा।






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