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तेज आवाज में बजाया डीजे तो लगेगा भारी जुर्माना, छत्तीसगढ़ सरकार सख्त.....

2 days ago
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

रायपुर:- छत्तीसगढ़ में तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर सख्ती की तैयारी है। राज्य सरकार ने इसके लिए कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026 का प्रारूप तैयार किया है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल से पहले जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना जरूरी होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना, कारावास और उपकरण जब्त करने जैसे प्रावधान प्रस्तावित हैं। हालांकि महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी यह विधेयक/अधिनियम का प्रारूप है। गृह एवं पुलिस विभाग ने इस पर आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से 5 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसलिए प्रस्तावित प्रावधानों को अभी से लागू कानून मानना सही नहीं होगा।


















अस्पताल-स्कूल के 100 मीटर दायरे में शांत क्षेत्र

प्रारूप में अस्पताल, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, न्यायालय, केंद्र एवं राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के कार्यालयों के आसपास 100 मीटर की परिधि को शांत क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त सार्वजनिक आदेश के जरिए अन्य क्षेत्रों को भी शांत क्षेत्र घोषित कर सकेंगे। प्रस्ताव में सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक के समय को 'दिन का समय' और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक को 'रात्रि का समय' माना गया है।


नियम तोड़ा तो भारी जुर्माने का प्रस्ताव

प्रस्तावित कानून के मुताबिक पहली बार दोषी पाए जाने पर कारावास या कम से कम 50 हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। यदि उल्लंघन शांत क्षेत्र में किया जाता है तो सजा एक वर्ष तक और न्यूनतम जुर्माना 75 हजार रुपए तक होने का प्रावधान प्रस्तावित है। दोबारा दोषी पाए जाने पर तीन महीने से एक वर्ष तक कारावास और न्यूनतम एक लाख रुपए जुर्माने का प्रस्ताव है। शांत क्षेत्र में दोबारा अपराध होने पर छह महीने से दो वर्ष तक की सजा और न्यूनतम डेढ़ लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। आपूर्तिकर्ता का पंजीयन स्थायी रूप से निरस्त करने का प्रावधान भी प्रस्ताव में शामिल है।


साउंड सिस्टम देने वालों का भी पंजीयन

प्रारूप के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना ध्वनि प्रवर्धन यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित होगा। ध्वनि उपकरणों का निर्माण, बिक्री या आपूर्ति करने वाले व्यक्ति और संस्थाओं के लिए स्थानीय पुलिस सत्यापन के साथ निर्धारित कार्यालय में पंजीयन कराने का प्रस्ताव है। साउंड सिस्टम आपूर्तिकर्ता ऐसे व्यक्ति को उपकरण किराए पर नहीं दे सकेंगे, जिसके पास वैध अनुमति न हो। इसके साथ ध्वनि की तीव्रता मापने वाले साउंड मीटर को लेकर भी नियम प्रस्तावित किए गए हैं।



कार्यक्रमों के लिए अधिकतम 6 घंटे की अनुमति

विशेष रैली, कार्यक्रम या उत्सव के लिए सक्षम प्राधिकारी दिन के समय अधिकतम छह घंटे तक ध्वनि यंत्रों के इस्तेमाल की अनुमति दे सकेंगे। एक कैलेंडर वर्ष में कुल 15 दिनों तक रात में मध्यरात्रि तक रियायत दिए जाने का प्रावधान भी रखा गया है। शांत क्षेत्र को लेकर नियम अधिक सख्त प्रस्तावित किए गए हैं। प्रारूप के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में ध्वनि प्रवर्धन यंत्रों के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। फिलहाल इस प्रारूप पर सुझाव और आपत्तियां मंगाई जा रही हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम कानून बनने के बाद ही इसके प्रावधान प्रभावी होंगे।


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