ईंधन की कीमतें: जानें क्यों सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को दी राहत....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
बिजनेस डेस्क: पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर वाहन चालकों के लिए फिलहाल राहत बनी हुई है। निजी क्षेत्र की तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने देशभर में अपने पेट्रोल पंपों पर ईंधन के दाम बढ़ा दिए हैं, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को फिलहाल कोई नया झटका नहीं दिया है। 5 अक्टूबर 2026 को इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने पेट्रोल-डीजल की मौजूदा दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
नायरा एनर्जी ने बढ़ाए दाम
नायरा एनर्जी ने 3 अक्टूबर से पेट्रोल में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू की है। देशभर में कंपनी के 7,100 से अधिक पेट्रोल पंप हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती लागत के कारण कंपनी ने यह कदम उठाया है। वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। नायरा की इस बढ़ोतरी के बाद यह आशंका जताई जाने लगी थी कि सरकारी कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं, हालांकि 5 अक्टूबर को सरकारी पंपों पर दरें स्थिर रहीं।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर 5 अक्टूबर को प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार दर्ज किए गए:
दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 | डीजल ₹95.20 प्रति लीटर
मुंबई: पेट्रोल ₹111.21 | डीजल ₹97.83 प्रति लीटर
कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51 | डीजल ₹99.82 प्रति लीटर
चेन्नई: पेट्रोल ₹107.76 | डीजल ₹99.55 प्रति लीटर
चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 | डीजल ₹86.09 प्रति लीटर
मेरठ: पेट्रोल ₹101.44 | डीजल ₹94.91 प्रति लीटर
भोपाल: नायरा और सरकारी पंपों के दामों में बड़ा अंतर
भोपाल में नायरा एनर्जी और सरकारी तेल कंपनियों के रेट में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। नायरा के पंपों पर पेट्रोल ₹119.54 और डीजल ₹102.64 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं, इंडियन ऑयल के पंप पर पेट्रोल लगभग ₹114.65 और डीजल ₹99.74 प्रति लीटर बिक रहा है। यानी एक ही शहर में अलग-अलग कंपनियों के पंपों पर चालकों को अलग-अलग कीमतें चुकानी पड़ रही हैं।
शहर बदलते ही क्यों बदलते हैं रेट?
देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम एक समान नहीं होते। अलग-अलग राज्यों में लागू होने वाले स्थानीय टैक्स, वैट (VAT) और फ्रेट चार्ज (भाड़ा) अंतिम कीमत को तय करते हैं। इसके अलावा कंपनी और डीलर मार्जिन के आधार पर भी दरों में भिन्नता आ जाती है।
सरकारी कंपनियों ने क्यों बनाए रखी राहत?
देश के ईंधन खुदरा बाजार में सरकारी तेल कंपनियों की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से भी अधिक है। मई के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आया है, लेकिन इसके बावजूद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कीमतों को नियंत्रित रखा है। यदि सरकारी कंपनियां दाम बढ़ाती हैं, तो इसका सीधा असर देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं और महंगाई पर पड़ेगा।
आगे क्या रहेंगे संकेत?
सरकारी पंपों पर फिलहाल कीमतें स्थिर हैं, लेकिन आगे की दिशा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की स्थिति, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो घरेलू सरकारी कंपनियों पर भी दरें बढ़ाने का दबाव बन सकता है। फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों की ओर से कीमत बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिए गए हैं।






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