मुस्लिम समाज को शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर: डॉ. सलीम राज...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम समाज के विकास और शिक्षा को लेकर एक अहम प्रेस वार्ता की। इस बैठक में मदरसा शिक्षा, नई शिक्षा नीति, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका और केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस खास मौके पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद शादाब शम्स भी मौजूद रहे।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए डॉ. सलीम राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मुस्लिम समाज सहित सभी पात्र लोगों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। समाज के लोगों को भी इन अवसरों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाकर आगे आना चाहिए।
आधुनिक और दीनी तालीम का हो संगम -
मुस्लिम बच्चों और युवाओं के भविष्य को शिक्षा और कौशल से जोड़ते हुए डॉ. राज ने कहा कि आज के दौर में ऐसी शिक्षा प्रणाली की सख्त जरूरत है, जिसमें दीनी (धार्मिक) और सांस्कृतिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी शामिल हो। छात्रों को कंप्यूटर, विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक कौशल में भी निपुण होना चाहिए।
एक हाथ में कुरान, दूसरे में कंप्यूटर -
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण का खास तौर पर जिक्र किया, जिसमें मदरसे के बच्चों के "एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर" होने की बात कही गई है। डॉ. सलीम राज के मुताबिक, इस सोच का मुख्य उद्देश्य यही है कि मुस्लिम समाज के बच्चे अपनी परंपरा और संस्कृति से भी जुड़े रहें और उनके पास आधुनिक ज्ञान तथा तकनीक के भी पूरे अवसर हों, ताकि वे विकास की दौड़ में किसी से पीछे न रहें।






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