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शिक्षा विभाग की सख्ती, स्कूल में शराब पीते पकड़े गए दो शिक्षक निलंबित...

Aug 3
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

गरियाबंद :- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में शिक्षा विभाग ने अनुशासनहीनता के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। मैनपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला देवझर (अमली) में पदस्थ दोनों शिक्षकों पर स्कूल परिसर में शराब पीने और छात्रों की मौजूदगी में अनुचित गतिविधि करने का आरोप लगा था। शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की और कार्रवाई करते हुए दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।


जानकारी के अनुसार, मैनपुर विकासखंड अंतर्गत देवझर (अमली) स्कूल में पदस्थ शिक्षक मनोज कुमार भारद्वाज और कमल सिंह दीवान थे। दोनों शिक्षक स्कूल कार्यालय के अंदर बैठे शराब का सेवन कर रहे थे और साथ में चखना भी खा रहे थे। सबसे गंभीर बात यह थी कि इस दौरान स्कूल परिसर में कई छात्र-छात्राएं मौजूद थे और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।


अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच कराई। जांच के दौरान स्कूल में शिक्षकों के इस व्यवहार को विभागीय नियमों और शिक्षक आचरण संहिता के खिलाफ माना गया। इसके बाद दोनों शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। शिक्षकों से पूरे मामले को लेकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए थे। विभागीय अधिकारियों ने शिक्षकों के जवाब और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया कि मामला गंभीर प्रकृति का है। इसके बाद संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर द्वारा दोनों शिक्षकों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। शिक्षा विभाग ने साफ किया कि स्कूल जैसे पवित्र स्थान पर इस तरह की गतिविधियां किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएंगी।


निलंबन आदेश के तहत शिक्षक मनोज कुमार भारद्वाज और कमल सिंह दीवान का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय मैनपुर निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों शिक्षकों को शासन के नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। हालांकि, इस मामले में विभागीय जांच की प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक समाज में बच्चों के मार्गदर्शक होते हैं और उनसे जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है। स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि से छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


इस घटना के बाद क्षेत्र में भी चर्चा तेज हो गई है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग की कार्रवाई का समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के सीखने और संस्कार प्राप्त करने का स्थान है, इसलिए वहां शिक्षकों को पूरी जिम्मेदारी और मर्यादा के साथ कार्य करना चाहिए। गरियाबंद जिले में हुई इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग ने यह संदेश दिया है कि सरकारी स्कूलों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और गलत आचरण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में भी विभाग ऐसे मामलों पर सख्त नजर रखने की बात कह रहा है।

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