सीआईआई एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0 का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने किया शुभारंभ.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर, छत्तीसगढ़ को औद्योगिक हब बनाने और छोटे व मझोले उद्योगों (MSME) को नई उड़ान देने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में शनिवार को दो दिवसीय ‘एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0’ की भव्य शुरुआत हुई। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की राज्य परिषद द्वारा आयोजित इस अहम कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने किया।

"नवाचार एवं सतत औद्योगिक विकास द्वारा एमएसएमई का सशक्तिकरण" की थीम पर आधारित इस कॉन्क्लेव के पहले दिन नीति-निर्माताओं, 250 से ज्यादा उद्यमियों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने शिरकत की। कार्यक्रम का मुख्य फोकस ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, फंडिंग, आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर रहा।

छोटे उद्योग राज्य की तरक्की का मुख्य आधार: विजय शर्मा -
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में छोटे कारखानों और लघु उद्योगों का योगदान सबसे अहम होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमएसएमई सेक्टर की तरक्की के लिए बेहतर कानून-व्यवस्था, सुगम सड़क नेटवर्क और तेजी से मिलने वाली प्रशासनिक स्वीकृतियां बेहद जरूरी हैं। राज्य सरकार इन तीनों मोर्चों पर शानदार माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है। नई उद्योग नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें समावेशी विकास की साफ झलक देखने को मिलती है।
बस्तर-सरगुजा तक पहुंचेंगी सुविधाएं: लखन लाल देवांगन -
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने एमएसएमई को राज्य की औद्योगिक नीति का केंद्र बिंदु बताया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि कोशिश यह है कि बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों के उद्यमियों को भी उद्योग लगाने के लिए वैसी ही तेज और सहज सुविधाएं मिलें जैसी रायपुर में मिलती हैं।

उद्योगों के लिए तैयार हो रहा प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर -
कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने बताया कि राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित भूमि और 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर से छोटी इकाइयों को तुरंत अपना उत्पादन शुरू करने में काफी सहूलियत होगी। वहीं, सीआईआई छत्तीसगढ़ के चेयरमैन बजरंग गोयल ने एमएसएमई को औद्योगिक मूल्य-श्रृंखला की रीढ़ बताते हुए शासन और उद्योग जगत के बीच सीआईआई की भूमिका को अहम बताया।
फंडिंग और पारदर्शी सिस्टम पर मंथन -
"एमएसएमई विकास का वित्तपोषण" विषय पर बोलते हुए केंद्र सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनम्र मिश्रा ने अहम आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक देश भर में 7.3 करोड़ से अधिक उद्यम रजिस्टर हो चुके हैं और क्रेडिट गारंटी योजना का लाभ करोड़ों उद्यमियों तक पहुंचा है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस सत्र में उद्योग संचालनालय के संचालक प्रभात मलिक ने सिंगल-विंडो सिस्टम और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। इस दौरान क्रेडाई अध्यक्ष पंकज लाहोटी, आरएडीए अध्यक्ष कैलाश खेमानी और छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने भी उद्योगों से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं और सुझावों को मंच पर रखा।
एआई तकनीक और बड़े कॉर्पोरेट बनने के सफर पर चर्चा -
कॉन्क्लेव में केवल पारंपरिक उद्योगों ही नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों पर भी जोर दिखा। सीआईआई पैनल के आदित्य मूंदड़ा, आनंद सिंघानिया, इरफान बुखारी और रोमिल राठी जैसे प्रतिनिधियों के नेतृत्व में 'एआई एडवांटेज' और 'SME से बड़े कॉर्पोरेट बनने की यात्रा' जैसे विषयों पर गहरे अनुभव साझा किए गए।
दूसरे दिन क्या रहेगा खास ?
29 सितंबर को कॉन्क्लेव का दूसरा दिन एमएसएमई पेशेवरों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगा। इसमें 'टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस' (TPM) और 'काइज़ेन विद एआई' जैसे सेशंस होंगे, जिनके जरिए कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, मशीनरी की क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने और कामकाज में लगातार सुधार करने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी।






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