प्रमुख विपक्षी मार्च पर बवाल: अखिलेश यादव की हिरासत के बाद यूपी में उबाल, लखनऊ से गोरखपुर तक सड़कों पर उतरे सपा कार्यकर्ता...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
लखनऊ: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने और उनके इस्तीफे की पुरजोर मांग को लेकर देश के 19 प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' का आह्वान किया गया था। इस मार्च को पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को बलपूर्वक हिरासत में लिए जाने के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। इस घटनाक्रम से आक्रोशित सपा समर्थक मंगलवार को राज्य के विभिन्न जिलों में उग्र प्रदर्शन करते नजर आए। राजधानी लखनऊ से लेकर मुख्यमंत्री के गृह जिला गोरखपुर तक कार्यकर्ताओं ने तीखा विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें भी हुईं।
राजधानी में हजरतगंज चौराहा बना अखाड़ा -
लखनऊ के व्यस्त हजरतगंज चौराहे पर बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता एकत्र हुए और सरकार विरोधी जोरदार नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभाला और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में भर-कर वहां से हटाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी कि जब तक उनके नेता को सम्मान सहित रिहाई नहीं मिलती और मुख्य चुनाव आयुक्त पद त्याग नहीं करते, तब तक राज्यभर में आंदोलन का सिलसिला थमने वाला नहीं है। उग्र तेवर दिखाते हुए सपाइयों ने आगामी दिनों में पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर 'जेल भरो आंदोलन' छेड़ने का ऐलान भी किया है।
गोरखपुर के अंबेडकर चौक पर गूंजे तीखे नारे -
पूर्वांचल के केंद्र गोरखपुर में भी अखिलेश यादव की गिरफ्तारी का तीव्र प्रतिकार देखने को मिला। अंबेडकर चौराहे पर लगभग पचास से अधिक की संख्या में पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। हाथों में तख्तियां और बैनर थामे प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आक्रामक नारेबाज़ी की। "वोट चोर इस्तीफा दो" और "गद्दी छोड़ो" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया कि लोकतंत्र की आवाज दबाने की हर कोशिश का डटकर मुकाबला किया जाएगा।
हिरासत में जाने से पहले दिए गए तीखे तेवर -
पुलिस द्वारा रोके जाने और हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि यदि चुनाव आयोग निष्पक्षता का दावा करता है, तो उसे विपक्ष की बात सुनने से परहेज नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को सीधे तौर पर देश और संविधान के लोकतंत्र को बचाने की आखिरी लड़ाई करार दिया। पुलिसिया रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार का दमनकारी तरीका तानाशाही को दर्शाता है, जिसके बाद से पार्टी का जमीनी कैडर और अधिक आक्रामक हो गया है।
पूरे प्रदेश में आंदोलन को तेज करने की चेतावनी -
राजधानी और गोरखपुर के अलावा भी उत्तर प्रदेश के अन्य कई जिलों से समाजवादी कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने की खबरें सामने आई हैं। पार्टी का स्थानीय नेतृत्व लगातार बैठकें कर रहा है और प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे और माँगे पूरी नहीं हुईं, तो यह विरोध प्रदर्शन और अधिक व्यापक रूप लेगा। फिलहाल पूरे राज्य में पुलिस और खुफिया तंत्र हाई अलर्ट पर है।






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