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174 जिंदगियों के रक्षक कैप्टन स्मित को मिलेगा ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा अवॉर्ड’....

2 days ago
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली। गंभीर संकट के बावजूद यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए दिखाए गए साहस और सूझबूझ की प्रधानमंत्री ने सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईदुबई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने कैप्टन स्मित के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना भी की। फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी, तभी कॉकपिट में गंभीर सुरक्षा घटना हुई। जांच एजेंसियों के अनुसार सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मछार पर हमला किया और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की। इस हमले में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने संकट के बीच हिम्मत नहीं खोई।

प्रधानमंत्री ने विपरीत परिस्थितियों में दिखाए गए उनके साहस, संयम और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। रिपोर्टों के मुताबिक गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिससे अन्य क्रू सदस्य और विमान में मौजूद लोग मदद के लिए अंदर पहुंच सके। इसके बाद हमलावर को काबू किया गया। विमान को बाद में सऊदी अरब के ताबुक में आपातकालीन रूप से उतारा गया और यात्रियों की जान बच गई। प्रधानमंत्री मोदी ने फोन पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित से घटना के बारे में जानकारी ली। कैप्टन ने उन्हें उस समय की परिस्थितियों और संकट के दौरान लिए गए फैसलों के बारे में बताया। इस घटना के बाद कैप्टन स्मित को भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सराहना मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले सार्वजनिक संदेश में भी उन्हें साहसी पायलट बताते हुए कहा था कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण हिम्मत दिखाई। फ्लाईदुबई की इस उड़ान में 174 यात्री सवार थे। घटना के दौरान विमान में अचानक पैदा हुई स्थिति ने सभी को संकट में डाल दिया था। रिपोर्टों के अनुसार सह-पायलट के कथित हमले के बाद विमान ने तेजी से ऊंचाई भी खोई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई थी। ऐसे समय में कैप्टन स्मित की प्रतिक्रिया ने बड़ी दुर्घटना को टालने में अहम भूमिका निभाई।


कैप्टन स्मित को गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उन्हें सऊदी अरब से संयुक्त अरब अमीरात ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी रहा। भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने भी अस्पताल पहुंचकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की तथा आवश्यक सहायता का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने बताया कि कठिन परिस्थितियों में यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा की जिम्मेदारी ने उन्हें हिम्मत दी। पायलट के तौर पर वर्षों के अनुभव और प्रशिक्षण ने भी संकट के समय तुरंत निर्णय लेने में मदद की। कैप्टन स्मित के पास करीब 15 वर्षों का उड़ान अनुभव और लगभग 9,750 घंटे की उड़ान का रिकॉर्ड बताया गया है। मूल रूप से मुंबई से जुड़े कैप्टन स्मित ने अपनी उड़ान प्रशिक्षण की शुरुआत न्यूजीलैंड से की थी। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक भारतीय विमानन क्षेत्र में काम किया और 2022 में फ्लाईदुबई से जुड़े। उनके परिचितों और पुराने सहयोगियों ने उन्हें अनुभवी और पेशेवर पायलट बताया है। कैप्टन स्मित के साहस की प्रशंसा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी की है। उन्होंने उनके कदमों को यात्रियों की जान बचाने वाला बताया। हालांकि सह-पायलट के कथित हमले के पीछे क्या वजह थी, इसकी जांच अभी भी जारी है।


संयुक्त अरब अमीरात सहित संबंधित देशों की एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घटना पहले से योजनाबद्ध थी या नहीं। गुजरात सरकार ने भी कैप्टन स्मित के साहस को सम्मानित करने की घोषणा की है। राज्य सरकार ने उन्हें ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा अवॉर्ड’ देने की बात कही है। यह सम्मान 174 यात्रियों की जान बचाने में उनकी भूमिका और गंभीर संकट में दिखाए गए साहस के लिए दिया जाएगा। घटना की जांच के साथ विमानन सुरक्षा से जुड़े कई सवालों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कॉकपिट सुरक्षा, पायलटों की जांच और किसी आपात स्थिति में क्रू की प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं की समीक्षा की जा सकती है। संबंधित विमानन प्राधिकरण पूरे घटनाक्रम के तकनीकी और सुरक्षा पक्ष की पड़ताल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और कैप्टन स्मित के बीच बातचीत ने एक बार फिर इस घटना को चर्चा में ला दिया है। प्रधानमंत्री ने उनकी बहादुरी को देश के लिए गर्व का विषय बताया और कहा कि संकट के सबसे मुश्किल क्षण में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। कैप्टन स्मित फिलहाल स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। उनके जल्द ठीक होने के लिए भारत और विदेशों से शुभकामनाएं मिल रही हैं। 174 यात्रियों की जान बचाने में उनकी भूमिका और गंभीर चोटों के बावजूद दिखाई गई सूझबूझ को विमानन जगत में असाधारण साहस के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।


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