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बिलासपुर: नाबालिक से दुष्कर्म के आरोपी छोटू यादव की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज.....

Sep 17
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

बिलासपुर:- हाईकोर्ट ने नाबालिक से दुष्कर्म के आरोपी युवक की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले में पीड़िता के बयान, गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सकीय साक्ष्य और नवजात की DNA जांच रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध होते हैं। डीएनए रिपोर्ट में आरोपी को पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। आरोपी छोटू यादव बिहार के सहरसा जिले के बड़ियारी गांव का रहने वाला है और वर्तमान में कोरबा जिले के आवराकछार चुहिया में रहता है।

















उसके खिलाफ कोरबा के अजाक थाने में पॉक्सो अधिनियम की धारा 4, 6 और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(V) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभियोजन के अनुसार 4 मई 2025 को पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि परिवार के साथ जंगल जाने के दौरान उनकी दूसरी बेटी घर पर अकेली थी। लौटने पर वह घर से गायब मिली। 10 मई को पीड़िता खुद घर लौट आई। लड़की द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर परिजनों ने आरोपी के खिलाफ अजाक थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच में आरोपी के साथ शारीरिक संबंध होने और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने 17 सितंबर 2025 को चालान प्रस्तुत किया, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय कर दिए।


ट्रायल कोर्ट में पीड़िता ने आरोपी पर प्रेम जताने और शादी का भरोसा देकर जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया। आरोपी उसे जंगल और अपने घर के आंगन में ले गया और करीब छह-सात बार संबंध बनाए। बाद में उसे अपनी गर्भावस्था की जानकारी हुई और उसने आरोपी को भी बताया। पीड़िता के अनुसार बरामदगी के समय वह करीब सात-आठ महीने की गर्भवती थी। उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन करीब एक सप्ताह बाद बच्चे की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान की पुष्टि गर्भावस्था संबंधी चिकित्सकीय साक्ष्य से होती है। इससे भी महत्वपूर्ण DNA जांच रिपोर्ट है, जिसमें आरोपी को मृत बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। कोर्ट ने माना कि यह रिपोर्ट आरोपी और पीड़िता के बीच शारीरिक संबंध होने के आरोप को महत्वपूर्ण आधार देती है। आरोपी ने अपने बचाव में कहा कि पीड़िता खुद उसके साथ पटना और चांपा गई थी और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। साथ ही पीड़िता की उम्र को लेकर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट ने पाया कि घटना के समय पीड़िता 18 वर्ष से कम उम्र की थी।

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