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बिलासपुर हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मी के प्रमोशन दावे पर विचार के दिए निर्देश...

Aug 24
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि एक वेतनवृद्धि को बिना संचयी प्रभाव के रोकना मामूली दंड है | ऐसे दंड को बड़ा दंड मानकर कर्मचारी को पदोन्नति के लिए विचार से बाहर नहीं किया जा सकता | न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता शेखर सिन्हा के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति के दावे पर विचार करने के निर्देश दिए |


याचिकाकर्ता शेखर सिन्हा वर्ष 1991 में आरक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे और वर्ष 2008 में उन्हें प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति मिली थी | वर्ष 2021 में उनके खिलाफ एक वेतनवृद्धि को बिना संचयी प्रभाव के रोकने का दंड लगाया गया | इसके बाद जब उनके सहकर्मियों को सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए विचार किया गया, तो शेखर सिन्हा के नाम पर विचार नहीं किया गया | शेखर सिन्हा की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि उनके खिलाफ लगाया गया दंड गैर-संचयी प्रभाव वाला था | इसलिए इसे बड़ा दंड मानकर पदोन्नति के लिए विचार से बाहर करना कानूनन उचित नहीं है |


उन्होंने राज्य सरकार द्वारा भरोसा किए गए 24 अप्रैल 2000 के परिपत्र और सुप्रीम कोर्ट के State of Madhya Pradesh vs. Radhika Prasad Dubey मामले में दिए गए फैसले के कानूनी पहलुओं को भी न्यायालय के समक्ष रखा | हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उक्त फैसले और मामले से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद स्पष्ट किया कि संचयी प्रभाव के साथ वेतनवृद्धि रोकना बड़ा दंड है, जबकि बिना संचयी प्रभाव के वेतनवृद्धि रोकना मामूली दंड की श्रेणी में आता है |


कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के मामले में 24 अप्रैल 2000 के परिपत्र को लागू करना स्पष्ट रूप से गलत था और यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा राधिका प्रसाद दुबे मामले में निर्धारित कानून के विपरीत है | हाईकोर्ट ने शेखर सिन्हा की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है | कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि उन्हें पदोन्नति दी जाती है तो पदोन्नत पद से जुड़े सभी लाभ उस तारीख से दिए जाएं, जिस तारीख को उनके कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति मिली थी |

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