बड़ा ख़ुलासा: ग्यारह साल से सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वकील की तस्वीरें वायरल, सरगुजा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल!
एक कथित ऑडियो लीक होने के बाद खुली पोल; नाबालिग बेटे के हाथों में भी दिखे खतरनाक हथियार, मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में कानून व्यवस्था कटघरे में।

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़):
क्या प्रशासनिक सख्ती सिर्फ आम जनता के लिए है और रसूखदारों के सामने कानून आंखें मूंद लेता है? यह सवाल इन दिनों छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल होने के बाद, अंबिकापुर के एक अधिवक्ता की फेसबुक प्रोफाइल पर अपलोड की गईं पुरानी तस्वीरें अब ताबड़तोड़ सवाल खड़े कर रही हैं। इन तस्वीरों में खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस प्रशासन पिछले एक दशक से अधिक समय से इस पर पूरी तरह बेखबर बना हुआ है।
तस्वीर नंबर 1: एके-47 और ग्रेनेड लॉन्चर जैसे घातक हथियारों का प्रदर्शन
मिली जानकारी के अनुसार, फेसबुक पर साल 2015 की शुरुआत की एक तस्वीर सार्वजनिक है, जिसमें एक वकील महोदय असॉल्ट राइफल (एके-47 पैटर्न) जैसे दिखने वाले हथियार के साथ नजर आ रहे हैं। इस राइफल के नीचे एक विशेष अटैचमेंट भी दिखाई दे रहा है, जो प्रथम दृष्टया अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGL) की तरफ इशारा करता है।

अब बड़ा सवाल यह है कि एक सामान्य पेशेवर व्यक्ति के पास इस तरह के प्रतिबंधित हथियार कहां से आए? क्या यह किसी सुरक्षा बल या पुलिस की सरकारी गन थी? यदि यह असली हथियार है, तो यह आर्म्स एक्ट (Arms Act) की धारा 7 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें केंद्र सरकार की विशेष अनुमति के बिना ऐसे हथियार रखना गंभीर अपराध माना जाता है।
एक के बाद एक कई हथियारों के साथ सामने आईं तस्वीरें
यह मामला सिर्फ एक तस्वीर तक सीमित नहीं है। पड़ताल करने पर पता चलता है कि फरवरी 2015 में हाथ में पिस्टल और साल 2017 में स्कोप लगी लंबी राइफल के साथ तस्वीरें साझा की गई हैं।
क्या इन सभी हथियारों के वैध लाइसेंस मौजूद थे?
अगर लाइसेंस नहीं था, तो बिना कागजात के इतने भारी हथियार रखने पर अब तक कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
पिछले 11 वर्षों से कानून के रखवाले इस मामले पर क्यों चुप बैठे रहे?

हद तो तब पार हुई जब नाबालिग बेटे के हाथ में थमा दिए गए हथियार
मामला तब और अधिक संवेदनशील हो जाता है जब बच्चों की सुरक्षा और कानून के दायरे को ताक पर रख दिया जाता है। अक्टूबर 2015 और जुलाई 2018 की कुछ तस्वीरों में एक नाबालिग बच्चा लंबी बैरल वाली बंदूक (शॉटगन) और एक धारदार तलवार के साथ पोज देता हुआ दिखाई दे रहा है।
भारतीय कानून के तहत आर्म्स एक्ट की धारा 9 साफ निर्देश देती है कि एक तय उम्र से कम के व्यक्ति को हथियार सौंपना या उसके पास रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसे में बच्चे को खतरनाक हथियार देने का जोखिम क्यों उठाया गया और क्या वह हथियार लोड था, यह जांच का बड़ा विषय है।
एक वायरल ऑडियो ने खोला राज
यह पूरा प्रकरण तब सतह पर आया जब सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हुई। हालांकि उस ऑडियो की सत्यता की पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन उसके बाद जब लोगों ने सोशल मीडिया अकाउंट्स की पड़ताल की, तो हथियारों का यह पूरा जखीरा सबके सामने आ गया।

जनता के तीखे सवाल और मुख्य मांगें:
हथियारों की जांच: तस्वीरों में दिख रहे सभी हथियारों के स्रोत, मालिकाना हक और लाइसेंस की तुरंत निष्पक्ष जांच की जाए।
प्रशासन की जवाबदेही: साल 2015 से लेकर अब तक यानी 11 सालों तक खुफिया तंत्र और पुलिस विभाग की तरफ से कोई सुध क्यों नहीं ली गई?
समान कार्रवाई: यदि कानून सबके लिए बराबर है, तो इस मामले में अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?






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