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बलौदाबाजार में फर्जी तबादला आदेश मामला: आरएमए रवि सेन की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट से नहीं मिली राहत....

11 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

Baloda Bazar: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में चर्चित फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर प्रकरण में कोर्ट ने एक आरोपी को बड़ा झटका दिया है। तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरएमए (RMA) रवि सेन की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इससे पहले पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में गत 22 अगस्त को कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में बलौदाबाजार जेल भेजा था।


क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद पलारी के रोहांसी अस्पताल में पदस्थ आरएमए करण देवांगन के कथित फर्जी स्थानांतरण पत्र से जुड़ा है। पुलिस जांच के मुताबिक, करण देवांगन अपनी पसंद की जगह पर ट्रांसफर करवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपने साथी रवि सेन के जरिए भाजपा के जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल से संपर्क किया था।


आरोप है कि इस काम को अंजाम देने के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसके बाद एक फर्जी ट्रांसफर लेटर तैयार किया गया। इस कागजात को लेकर जब करण देवांगन पलारी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. पंकज वर्मा के पास पहुंचे, तो उन्हें आदेश पर शक हुआ। बीएमओ ने जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय से इसकी सत्यता की पुष्टि कराई, तो यह पूरी तरह फर्जी निकला।


पुलिस कार्रवाई और अन्य खुलासे

बीएमओ की औपचारिक शिकायत के बाद पलारी थाने की पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं (जैसे 318(4), 336(3), 337, 338, 340(2) और 3(5)) के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें कृष्णा अवस्थी, उनके बेटे प्रणव अवस्थी, पुनिराम पटेल, आरएमए करण देवांगन, आरएमए रवि सेन और कंप्यूटर ऑपरेटर परख कश्यप शामिल हैं।


सूत्रों और पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपियों में शामिल कृष्णा अवस्थी और उनके पुत्र प्रणव पर सिर्फ ट्रांसफर के नाम पर ही नहीं, बल्कि नौकरी दिलाने के नाम पर भी लोगों से धोखाधड़ी करने और फर्जी नियुक्ति पत्र बांटने के गंभीर आरोप हैं। उनके खिलाफ बलौदाबाजार, रायपुर (तेलीबांधा) और पलारी थानों में कई मामले दर्ज हैं, जिनकी गहनता से पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, अदालत द्वारा रवि सेन की जमानत खारिज होने के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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