बालाघाट: स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल.....
बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत के बाद नल से गंदा पानी....
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने वीडियो शेयर कर राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर उठाए तीखे सवाल।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का लिया संज्ञान, सरकार ने परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजे का किया ऐलान।
मौतों का सीधा संबंध दूषित पानी से अब तक प्रमाणित नहीं; जांच में कुपोषण, मलेरिया और संक्रमण जैसे कई कारण आए सामने।
ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने हड़कंप मचा दिया है। इस वीडियो में नल से मटमैला और भूरे रंग का गंदा पानी निकलता दिख रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उसी क्षेत्र का है, जहां हाल ही में संक्रामक बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के चलते 30 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है। हालांकि, इस वीडियो की जगह और तारीख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

CJP संस्थापक ने उठाए सवाल, हुआ विरोध
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने एक्स (X) अकाउंट पर इस वीडियो को साझा करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल किया कि "क्या मंत्री और विधायक अपने बच्चों को ऐसा पानी पिलाएंगे?" दीपके ने प्रभावित गांवों (आदोरी, कोरका और बोंदारी) का दौरा भी किया, जहां उन्हें कुछ स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने उन पर मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि CJP कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने से रोका गया।
हाईकोर्ट का संज्ञान और सरकार का एक्शन
बच्चों की मौत के मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। दायर याचिका में अस्पतालों में क्षमता से अधिक मरीजों के इलाज, कुपोषण और दूषित पानी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसी बीच, राज्य सरकार ने मृत बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
वायरल वीडियो और मौतों के बीच कोई प्रमाणित संबंध नहीं
अपुष्ट दावों के विपरीत, अभी तक इस वायरल वीडियो और बच्चों की मौत के बीच कोई सीधा संबंध प्रमाणित नहीं हुआ है। केंद्रीय जांच में इन मौतों की कोई एक वजह नहीं पाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की मौत खसरा, मलेरिया, सांस की बीमारी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और एक से अधिक संक्रमण जैसी अलग-अलग जटिलताओं के कारण हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंदे पानी के सेवन से जलजनित बीमारियों का खतरा रहता है और कुपोषण की स्थिति में यह जानलेवा हो सकता है। लेकिन जब तक पानी की लैब जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और महामारी संबंधी अध्ययन सामने नहीं आ जाते, दूषित पानी को सीधे तौर पर मौतों की इकलौती वजह बताना जल्दबाजी होगी।
प्रशासनिक जांच की दरकार
वायरल वीडियो ने आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की पोल खोल दी है। पानी आपूर्ति व्यवस्था की तत्काल जांच, पाइपलाइनों का निरीक्षण और प्रभावित बस्तियों में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था अब प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल, प्रशासन की आधिकारिक जल परीक्षण रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।






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