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बरपेलाडीह-पीपलखूंटा मार्ग पर डामर गायब, अनदेखी पर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी.....

5 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

बसना:- बरपेलाडीह से पीपलखूंटा तक पहुंचने वाला करीब 3.20 किलोमीटर लंबा मार्ग दो दशक में विकास की तस्वीर से बदहाली की मिसाल बन गया है। वर्ष 2006 में लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित यह सड़क अब अपने मूल स्वरूप में नजर ही नहीं आती। डामर की परत पूरी तरह गायब हो चुकी है और सड़क का बड़ा हिस्सा गिट्टी, मुरूम, धूल और गड्ढों में तब्दील हो गया है।




















ग्रामीणों का कहना है कि करीब डेढ़ दशक से वे इसी हालत में आवागमन करने को मजबूर हैं।कभी पक्की सड़क होने का एहसास कराने वाला यह मार्ग अब वाहन चालकों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। जगह-जगह उखड़ी गिट्टियां और गहरे गड्ढे दुर्घटना की आशंका बढ़ाते हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। गड्ढों में पानी भरने के बाद सड़क की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जबकि सूखे मौसम में वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ाती है। मार्ग की पुलिया भी क्षतिग्रस्त बताई जा रही है, जिससे आवागमन के दौरान खतरा बना रहता है। इस सड़क का महत्व केवल दो गांवों को जोड़ने तक सीमित नहीं है। पीपलखूंटा सहित आसपास के ग्रामीणों के लिए यह रोजमर्रा के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। 


स्कूली बच्चे इसी मार्ग से बरपेलाडीह मिडिल स्कूल तथा भूकेल स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी-अंग्रेजी विद्यालय पहुंचते हैं। साइकिल से आने-जाने वाले विद्यार्थियों को उबड़-खाबड़ रास्ते पर संभलकर चलना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की हालत के कारण बरसात में बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी और बढ़ जाती है। सड़क की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग लंबे समय से उठती रही है। पीपलखूंटा की पूर्व जनपद सदस्य निरंजनी गोपीचंद पटेल तथा ग्राम पंचायत गुढ़ियारी के सरपंच श्रीकांत पटेल सहित ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान कई बार इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया है। ज्ञापन और मांगों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान नहीं हो सका है।


4.80 करोड़ का प्रस्ताव, अब स्वीकृति का इंतजार

लोक निर्माण विभाग द्वारा बरपेलाडीह–पीपलखूंटा मार्ग के पुल-पुलिया सहित जीर्णोद्धार के लिए करीब 4 करोड़ 80 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने लोकसभा सांसद रूपकुमारी चौधरी और बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल को भी ज्ञापन सौंपकर सड़क को बजट में शामिल कराने की मांग की है। अब ग्रामीणों की नजर प्रस्ताव की स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी है।


आश्वासन नहीं, अब सड़क पर दिखे काम

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क की बदहाली देख रहे लोगों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए। दो दशक पहले बनी सड़क की हालत आज ऐसी हो गई है कि डामर तलाशना मुश्किल है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मार्ग के जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक राशि स्वीकृत कर निर्माण प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए। उनका कहना है कि यदि इस बार भी मांग अनदेखी हुई तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

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