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अमरावती: आश्रमशाला में भूत-प्रेत की अफवाह, 608 बच्चों ने छोड़ा हॉस्टल....

Aug 14
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

अमरावती: महाराष्ट्र के अमरावती जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक सरकारी आश्रमशाला के छात्रावास में रहने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों को डरा दिया, चिखलदरा तहसील के मेलघाट इलाके की डोमा शासकीय आश्रमशाला में कुछ छात्राओं ने रात के समय घुंघरू बजने, किसी के हंसने और रोने जैसी आवाजें सुनाई देने की शिकायत की | देखते ही देखते इन आवाजों को लेकर छात्रावास में भूत-प्रेत की अफवाह फैल गई | डर इतना बढ़ा कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी छात्रावास छोड़कर अपने घर चले गए | हास्टल प्रशासन के अनुसार करीब 608 विद्यार्थियों ने हॉस्टल छोड़ा है, इनमें 263 छात्र और 345 छात्राएं शामिल हैं |


हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रशासन ने किसी भी तरह की ऐसी घटना से इनकार किया है, कुछ छात्राओं की मनोचिकित्सक से जांच कराई गई, जिसमें ‘सीवियर हिस्टीरिया’ जैसे लक्षण की जानकारी सामने आई है, अधिकारियों का कहना है कि यह मामला मानसिक स्वास्थ्य और सामूहिक डर से जुड़ा हो सकता है | डोमा आश्रमशाला में रहने वाली कुछ छात्राओं ने सबसे पहले अजीब आवाजों की शिकायत की, छात्राओं का कहना था कि उन्हें छात्रावास में घुंघरू बजने जैसी आवाज सुनाई देती है | कभी किसी के हंसने तो कभी रोने जैसी आवाजें भी सुनाई देने की बात कही गई | इन शिकायतों के बाद छात्रावास में रहने वाले दूसरे बच्चों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई | किसी ने इसे भूत-प्रेत से जोड़ दिया तो किसी ने रात के समय छात्रावास में किसी अदृश्य शक्ति के होने की बात कहनी शुरू कर दी, देखते ही देखते अफवाह ने ऐसा रूप ले लिया कि कई विद्यार्थी डर गए | बच्चों ने अपने माता-पिता को फोन कर छात्रावास से घर बुलाने की बात कही |


मामले का असर इतना बढ़ा कि सैकड़ों विद्यार्थी हॉस्टल छोड़कर अपने घर चले गए, पालकों के मुताबिक करीब 608 विद्यार्थियों ने छात्रावास छोड़ा है, इनमें 263 छात्र और 345 छात्राएं बताई जा रही हैं | एक साथ इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के छात्रावास छोड़ने से स्कूल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया | अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्चों से बातचीत शुरू की और जिन छात्राओं ने आवाजें सुनाई देने की शिकायत की थी, उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. यही जांच इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आई |


डोमा आश्रमशाला के मुख्याध्यापक संजय चौधरी के मुताबिक, कुछ छात्राओं ने अलग-अलग तरह की आवाजें सुनाई देने की शिकायत की थी, इसके बाद प्रशासन ने उनकी बात को गंभीरता से लिया और उन्हें अस्पताल ले जाकर मनोचिकित्सक से जांच कराई | प्रिंसिपल के अनुसार, डॉक्टर ने जांच के बाद छात्राओं में सीवियर हिस्टीरिया जैसे लक्षण होने की बात बताई, स्कूल प्रशासन का कहना है कि बच्चों के मन से डर निकालने के लिए उन्हें लगातार समझाया जा रहा है | विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी की जा रही है, ताकि अफवाह और भय का असर कम किया जा सके | ‘हिस्टीरिया’ शब्द का इस्तेमाल आम बोलचाल में अलग-अलग मानसिक या शारीरिक लक्षणों के लिए किया जाता रहा है | किसी व्यक्ति की वास्तविक स्थिति का चिकित्सकीय निर्धारण विशेषज्ञ की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है |


मामले को लेकर चिखलदरा के तालुका स्वास्थ्य अधिकारी अभिषेक नायडू का कहना है कि इस घटना को भूत-प्रेत या किसी अलौकिक शक्ति से जोड़ना उचित नहीं है, स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति हो सकती है और लोगों को अफवाह फैलाने से बचना चाहिए | उन्होंने बच्चों और उनके पालकों से घबराने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है | स्वास्थ्य विभाग का जोर विद्यार्थियों की स्थिति को समझने, जरूरत के अनुसार उनकी चिकित्सकीय जांच कराने और उनकी काउंसलिंग करने पर है | मामला सामने आने के बाद अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की टीम भी डोमा परिसर पहुंची, टीम ने विद्यार्थियों और उनके पालकों से बातचीत की, बच्चों को समझाया गया कि किसी भी ऐसी घटना को तुरंत भूत-प्रेत या आत्मा से जोड़ना उचित नहीं है | टीम का प्रयास बच्चों के मन से डर कम करना और उन्हें अफवाहों पर विश्वास न करने के लिए समझाना है | प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर बच्चों की काउंसलिंग पर भी जोर दिया जा रहा है, सैकड़ों बच्चों के छात्रावास छोड़कर घर लौटने के बाद पालकों की चिंता भी बढ़ गई है, कई अभिभावक अपने बच्चों को वापस हॉस्टल भेजने से पहले स्थिति पूरी तरह सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं | पालकों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को लेकर है, दूसरी तरफ प्रशासन यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि छात्रावास में किसी अलौकिक घटना के प्रमाण नहीं मिले हैं |


अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को डर के माहौल से निकालना प्राथमिकता है, आश्रमशाला में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के छात्रावास छोड़ने का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ सकता है | लंबे समय तक विद्यार्थी हॉस्टल से दूर रहे तो नियमित कक्षाओं में उनकी उपस्थिति प्रभावित होगी, इसी वजह से प्रशासन चाहता है कि अफवाह का जल्द से जल्द असर खत्म हो और बच्चे दोबारा सामान्य माहौल में पढ़ाई कर सकें, स्कूल प्रशासन विद्यार्थियों और उनके परिवारों को समझाने में जुटा है कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर शिक्षक और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें, लेकिन अफवाहों के आधार पर कोई फैसला न लें | अमरावती के डोमा आश्रमशाला का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ आवाजों की शिकायत से शुरू हुई बात कुछ ही समय में भूत-प्रेत की अफवाह तक पहुंच गई और देखते ही देखते 608 विद्यार्थी छात्रावास छोड़कर घर चले गए | प्रशासन का कहना है कि आश्रमशाला में भूत, आत्मा या किसी अलौकिक घटना का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है | जिन छात्राओं ने आवाजें सुनने की शिकायत की थी, उनकी चिकित्सकीय जांच कराई गई है, अब शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की टीम मिलकर विद्यार्थियों के डर को दूर करने की कोशिश कर रही है |

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