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कोटा क्षेत्र में 33 मरीज मिले, बिलासपुर में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप...

Aug 3
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश के मौसम में ग्रामीण इलाकों में जलभराव और मच्छरों की बढ़ती संख्या के कारण बीमारी तेजी से फैल रही है। स्वास्थ्य विभाग की लगातार निगरानी और जांच अभियान के बावजूद नए मरीज सामने आ रहे हैं। कोटा क्षेत्र में तीन नए मलेरिया मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां और तेज कर दी हैं। जानकारी के अनुसार, कोटा विकासखंड के औरापारा, केंदा सहित कई


ग्रामीण इलाकों में पिछले 14 दिनों से स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार कैंप लगाकर लोगों की जांच और उपचार कर रही हैं। क्षेत्र में सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ने के बाद विभाग ने विशेष निगरानी शुरू की है। अब तक जांच में कुल 33 लोगों में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मिले कुल मरीजों में से 16 मरीज अभी एक्टिव हैं और उनका इलाज जारी है। रविवार को तीन नए मरीजों की पुष्टि होने के बाद जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. वीके वैष्णव और कृष्णा कुमारी के नेतृत्व में विशेष स्वास्थ्य टीम प्रभावित गांवों में पहुंची। टीम द्वारा ग्रामीणों की जांच की जा रही है और संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।


कोटा क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार पहुंच रही है। स्वास्थ्य शिविरों में आने वाले ग्रामीणों का तत्काल रक्त परीक्षण किया जा रहा है। जिन लोगों में बुखार या मलेरिया के लक्षण पाए जा रहे हैं, उनका कार्ड टेस्ट कराया जा रहा है, ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर ही की जा सके। विभाग का उद्देश्य संक्रमण को फैलने से रोकना और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।


स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। मितानिनों के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को मलेरिया से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने घरों के आसपास साफ-सफाई रखें और कहीं भी पानी जमा न होने दें। क्योंकि रुके हुए पानी में मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लार्वा तेजी से पनपते हैं। विभाग द्वारा लोगों से अपील की गई है कि घरों के आसपास मौजूद गड्ढों, पुराने टायरों, बर्तनों या अन्य स्थानों पर जमा पानी को तुरंत खाली करें। शाम के समय मच्छरों से बचाव के लिए धुआं करने और मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह भी दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सावधानी और समय पर जांच से मलेरिया के गंभीर प्रभावों को रोका जा सकता है।


बारिश के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। यही कारण है कि मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि होती है और मलेरिया जैसी बीमारियां फैलने लगती हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर ऐसे स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां मच्छरों के लार्वा पनप सकते हैं। इसके बाद वहां दवा का छिड़काव और अन्य जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य शिविरों के जरिए लोगों को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जा रहा है।


विभाग की प्राथमिकता नए मामलों को रोकना और बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करना है। फिलहाल कोटा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं और लगातार मरीजों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि बुखार, सर्दी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और खुद से दवा लेने से बचें।

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