google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल हैं देश के 187 सांसद और विधायक, ADR रिपोर्ट में खुलासा.....

35 minutes ago
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

देशभर के 187 सांसद और विधायक महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल हैं। अगर दलों के हिसाब से देखें तो भाजपा के सबसे अधिक सांसदों और विधायकों पर महिला अपराध से जुड़े मामले हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।रिपोर्ट के अनुसार, एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने देश के 4899 में से 4881 वर्तमान सांसदों और विधायकों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है, जिसमें 5 साल की अवधि के दौरान इस्तीफे के कारण, मृत्यु या किसी और कारण से हुए उपचुनावों का विश्लेषण भी शामिल हैं।


एडीआर की रिपोर्ट से पता चला है कि 772 वर्तमान सांसदों और 4109 वर्तमान विधायकों में से 187 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं। रिपोर्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का भी जिक्र है, जिसमें बताया गया कि भारत में साल 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,41,534 मामले दर्ज हुए। इसके अनुसार, प्रतिदिन औसतन 1210 मामले सामने आए। दिल्ली और तेलंगाना में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर राष्ट्रीय औसत प्रति लाख महिला आबादी पर 64.6 मामलों की दर से लगभग दोगुनी दर्ज हुई। इसी विश्लेषण में एडीआर ने रिपोर्ट दी है कि 772 वर्तमान सांसदों और 4109 वर्तमान विधायकों में से 187 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं, जिसमें 19 वर्तमान सांसद और 188 वर्तमान विधायक हैं।


रिपोर्ट में बताया गया है कि विभिन्न दलों में भाजपा के सबसे अधिकतम 106 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं। इसके अलावा, कांग्रेस के 20 और टीडीपी के 18 वर्तमान सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से जुड़े मुकदमे हैं। राज्यों में पश्चिम बंगाल के सबसे अधिकतम 69 वर्तमान सांसद और विधायक हैं जबकि आंध्र प्रदेश के 22 और ओडिशा के 17 ऐसे वर्तमान सांसद व विधायक हैं, जिन्होंने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं। 14 वर्तमान सांसद और विधायक ऐसे हैं, जिन पर बलात्कार के मुकदमे हैं। इनमें से 2 वर्तमान लोकसभा सांसद और 12 वर्तमान विधायक हैं। बलात्कार के मामलों में दलवार स्थिति के अनुसार भाजपा और कांग्रेस सबसे ऊपर हैं। भाजपा के दो वर्तमान सांसदों और दो विधायकों पर बलात्कार के मामले हैं जबकि कांग्रेस के 4 विधायकों पर ऐसे मामले हैं।


इतने सारे प्रकरण दर्ज होने के पश्चात भी जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त इन जनप्रतिनिधियों के पुनः नामांकन के दौर आने पर उनके नामांकन को निरस्त क्यों नहीं करते? जबकि निर्वाचन में वही व्यक्ति भाग ले सकता है जिसके नाम पर किसी भी थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं होनी चाहिए और कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। यहाँ तक कि झूठा शपथ पत्र देने की जानकारी भी निर्वाचन संपन्न कराने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त को रहती है, जिनके पास अधिकार होने के बावजूद वे जनप्रतिनिधियों के ऊपर कार्रवाई नहीं करते। वहीं दूसरी ओर, मुकदमों का फैसला करने वाले जजों को धमकी दी जाती है कि यदि मेरे पक्ष में फैसला नहीं सुनाया और मुझे मुकदमे में हरा दिया, तो मैं तुझे और तेरे पूरे खानदान को श्मशान घाट पहुँचा दूंगा। जब फैसला करने वाला खुद अदालत के कटघरे में मुजरिम बनकर बैठा हो, तो न्यायालय में प्रकरण लंबित न रहे तो और क्या होगा?

राकेश कुमार साहू शालिनी न्यूज एजेंसी संवाददाता, जांजगीर-चांपा।

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html