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जब आंगन में छलका पानी बदल गई जिंदगानी....

Aug 13
3 min read
  • गलियों में पानी के बर्तनों का सफर थमा, अब हर सुबह नल की धार से शुरू होती है कहानी.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

रायपुर सुबह के वक्त अब सेवैयाकला की गलियों में पानी का बर्तन लिए महिलाओं की कतारें दिखाई नहीं देतीं। घरों के आंगन में लगे नल खुलते हैं और साफ पानी की धार बहने लगती है। बच्चों के हाथों में अब पानी से भरी बाल्टियां नहीं, स्कूल का बस्ता है। यह बदलाव अचानक नहीं आया। यह उस योजना का परिणाम है, जिसने पानी को सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान और राहत से जोड़ दिया है।


महासमुंद के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत टेका के आश्रित गांव सेवैयाकला ने इस साल जून में 'हर घर जल' का लक्ष्य हासिल कर लिया। जल जीवन मिशन के तहत अब गांव के सभी 185 घरों तक नियमित रूप से नल से स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। गांववालों के लिए यह केवल एक सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आया ऐसा बदलाव है, जिसे वे हर सुबह महसूस करते हैं।


गांव की देविका साहू मुस्कराते हुए कहती हैं, "पहले पानी लाना ही सबसे बड़ा काम था। गर्मी में तो कई बार आधा दिन इसी में निकल जाता था। अब नल खोलते ही पानी मिल जाता है। समय भी बचता है और चिंता भी खत्म हो गई है।" उनकी बात सुनते हुए आसपास खड़ी महिलाएं भी सहमति में सिर हिलाती हैं। गांव में शायद ही कोई ऐसा परिवार हो, जिसकी दिनचर्या इस बदलाव से अछूती रही हो।


दरअसल, पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं होता। गांवों में यह महिलाओं के श्रम, बच्चों के समय और पूरे परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। सेवैयाकला में नल से जल पहुंचने के बाद यही बदलाव सबसे स्पष्ट दिखाई देता है। सुबह के जिन घंटों में पहले पानी की जद्दोजहद होती थी, अब वही समय बच्चों की पढ़ाई, खेती-किसानी और घरेलू कामों में लग रहा है।


इस बदलाव के पीछे जल जीवन मिशन के तहत 81 लाख 52 हजार रुपए की लागत से तैयार की गई जलापूर्ति व्यवस्था है। गांव में 40 किलोलीटर क्षमता की ऊंची पानी टंकी बनाई गई है। 3825 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया है। प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र को भी इसी व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे बच्चों को भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।


सरपंच कमली बसंत और सचिव हेमलता साहू के नेतृत्व में योजना को समय पर पूरा किया गया। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि गांव ने इसे केवल सरकारी योजना मानकर नहीं छोड़ा। इसके संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति बनाई गई है। जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन-संधारण के लिए हर परिवार 60 रुपए प्रतिमाह दे रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में भी निर्बाध पानी मिलता रहे। गांव के मिथिलेश बसंत प्रतिदिन तय समय पर पंप संचालन कर पूरे गांव तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।


सेवैयाकला की कहानी बताती है कि विकास केवल आंकड़ों में नहीं दिखता, वह लोगों की बदली हुई दिनचर्या में दिखाई देता है। जब किसी महिला को पानी के लिए कई किलोमीटर नहीं चलना पड़ता, जब बच्चे पानी ढोने की जगह समय पर स्कूल पहुंचते हैं और जब हर घर में बिना चिंता के स्वच्छ पानी उपलब्ध होता है, तभी किसी योजना की असली सफलता दिखाई देती है।


आज सेवैयाकला में बहता पानी केवल नलों से नहीं आ रहा, बल्कि वह ग्रामीण जीवन में सुविधा, स्वास्थ्य और सम्मान का नया भरोसा भी लेकर आया है। जल जीवन मिशन की यह सफलता केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलाव की जीवंत मिसाल है।

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