महासमुंद के तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही कल्याणकारी योजनाएं....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
महासमुंद: छत्तीसगढ़ शासन की दूरदर्शी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ महासमुंद जिले के तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिल रहा है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के जरिए इन परिवारों को न केवल आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक संबल मिल रहा है, बल्कि उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह भी आसान हो रही है। जिला वनोपज सहकारी संघ मर्यादित के माध्यम से चलाई जा रही इन योजनाओं ने ग्रामीण अंचल के परिवारों को बड़ी राहत पहुंचाई है।
विपरीत परिस्थितियों में बनी आर्थिक ढाल -
राजमोहिनी देवी तेन्दूपत्ता संग्राहक बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत पात्र परिवारों को संकट के समय मजबूत वित्तीय सहायता दी जा रही है।
योजना के प्रावधानों के अनुसार, 18 से 50 वर्ष की आयु के संग्राहक मुखिया की सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये और दुर्घटना की स्थिति में अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान की जाती है।
इसी तरह, 50 से 59 वर्ष की आयु वर्ग के लिए भी सहायता राशि तय की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, महासमुंद जिला यूनियन के अंतर्गत अब तक हजारों हितग्राहियों को इन योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये की दावा राशि का सफलतापूर्वक भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को बड़ा संबल मिला है।
शिक्षा से संवर रहा बच्चों का भविष्य -
संग्राहक परिवारों के बच्चे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहें, इसके लिए सरकार विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है:
प्रतिभाशाली शिक्षा प्रोत्साहन योजना: इसके तहत कक्षा 10वीं और 12वीं में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को क्रमशः 15,000 रुपये और 25,000 रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है। जिले के सैकड़ों मेधावी छात्र-छात्राएं इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।
गैर-व्यावसायिक और व्यावसायिक शिक्षा: स्नातक स्तर (बी.ए., बी.कॉम, बी.एससी.) के साथ-साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल, विधि और एमबीए जैसे उच्च एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को भी नियमित छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
मेधावी छात्रवृत्ति: कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए भी विशेष पुरस्कार राशि बांटी गई है, जिससे ग्रामीण बच्चों में उच्च शिक्षा के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है।






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