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दिल्ली कचरा प्रबंधन: डेढ़ साल में 100 एकड़ जमीन कराई गई खाली....

46 minutes ago
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को राजधानी में वर्षों से बने कचरे के पहाड़ों को खत्म करने का संकल्प दोहराया। ओखला, गाजीपुर और सिंघोला में कचरा प्रसंस्करण सुविधाओं से जुड़े कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कचरे के पहाड़ के साथ अपनी “आखिरी सेल्फी” ली है। उनका कहना था कि अब उनका प्रयास रहेगा कि भविष्य में ऐसी तस्वीर लेने की जरूरत ही न पड़े। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “आज मैंने कचरे के पहाड़ के साथ अपनी आखिरी सेल्फी ली है; मैंने संकल्प लिया है कि कचरे का यह पहाड़ जल्द ही खत्म हो जाएगा।” उन्होंने बताया कि सरकार पुराने जमा कचरे को हटाने के साथ-साथ रोजाना पैदा होने वाले नए कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण पर भी काम कर रही है।


ओखला, गाजीपुर और सिंघोला में नई पहल

शनिवार को मुख्यमंत्री ने ओखला, गाजीपुर और सिंघोला लैंडफिल साइटों पर कचरा प्रसंस्करण से संबंधित परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन सुविधाओं का उद्देश्य पुराने कचरे के निपटारे के साथ नए कचरे के बढ़ते ढेर को रोकना है। सरकार की योजना के तहत रोजाना निकलने वाले ताजा कचरे को सीधे प्रसंस्करण व्यवस्था में भेजने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले कचरे के लिए भी प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है। इससे भविष्य में लैंडफिल साइटों पर नए कचरे का दबाव कम करने का लक्ष्य है।


डेढ़ साल में 100 एकड़ जमीन खाली कराने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले करीब डेढ़ साल में दिल्ली के तीन प्रमुख लैंडफिल स्थलों से लगभग 100 एकड़ जमीन को पुनः प्राप्त किया गया है। सरकार के अनुसार, पुराने कचरे को हटाने और भूमि को दोबारा उपयोग योग्य बनाने की प्रक्रिया में लगातार तेजी लाई जा रही है। दिल्ली के प्रमुख कचरा स्थलों में गाजीपुर, ओखला और भलस्वा शामिल हैं। दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, जून 2022 में किए गए ड्रोन सर्वे में इन तीनों स्थलों पर कुल करीब 203 लाख मीट्रिक टन विरासत कचरे का आकलन किया गया था। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान इन स्थलों पर 74.11 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण किया गया और शेष मात्रा घटकर 120.82 लाख मीट्रिक टन रह गई थी।


पुराने कचरे के साथ नए कचरे पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पुराने कचरे के पहाड़ को हटाना पर्याप्त नहीं है। अगर रोजाना निकलने वाला नया कचरा उसी तरह लैंडफिल में जमा होता रहेगा, तो समस्या दोबारा खड़ी हो जाएगी। इसी वजह से सरकार दो स्तरों पर काम कर रही है। पहला लक्ष्य पुराने और वर्षों से जमा विरासत कचरे को हटाना है। दूसरा, शहर से हर दिन निकलने वाले ताजा कचरे का प्रसंस्करण सुनिश्चित करना है, ताकि वह फिर से लैंडफिल का हिस्सा न बने। इसी के तहत नई प्रसंस्करण सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।


कचरा प्रबंधन और प्रदूषण का सीधा संबंध

दिल्ली में लैंडफिल केवल कचरा निस्तारण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका संबंध पर्यावरण और वायु गुणवत्ता से भी है। केंद्र सरकार के अनुसार खुले और पुराने डंपसाइटों पर जमा विरासत कचरे से जमीन और भूजल प्रदूषण, दुर्गंध, आग का खतरा और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हो सकता है। इसी कारण पुराने डंपसाइटों के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण को शहरी स्वच्छता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच हुई बैठकों में भी कचरा प्रबंधन पर समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया है। सितंबर 2026 में पर्यावरण मंत्रालय की बैठक में दिल्ली की प्रदूषण नियंत्रण योजना की समीक्षा के दौरान कचरा प्रबंधन समेत कई क्षेत्रों में तय उपायों को तेजी से लागू करने की बात कही गई थी।


लैंडफिल से जमीन वापस पाने की कोशिश

कचरे के पहाड़ हटने के बाद इन जमीनों का उपयोग किस तरह किया जाएगा, यह भी शहरी नियोजन के लिहाज से महत्वपूर्ण विषय है। वर्षों तक कचरे के ढेर के रूप में इस्तेमाल हुई जमीन को दोबारा सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाने के लिए कचरे की छंटाई, प्रसंस्करण और अवशेष सामग्री के वैज्ञानिक निपटारे की जरूरत होती है। केंद्र सरकार ने भी देशभर में विरासत डंपसाइटों को खत्म करने के लिए डंपसाइट रेमेडिएशन कार्यक्रमों पर जोर दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच देश में 3.66 करोड़ मीट्रिक टन विरासत कचरे का निस्तारण किया गया।


भलस्वा में भी तेजी से चल रहा काम

दिल्ली के भलस्वा डंपसाइट पर भी पुराने कचरे को हटाने का काम तेज किया गया है। केंद्र सरकार के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक भलस्वा में 99.07 लाख मीट्रिक टन विरासत कचरे का निस्तारण किया जा चुका था। शेष कचरे को अक्टूबर 2026 के मध्य तक साफ करने का लक्ष्य बताया गया था, जबकि मार्च 2026 तक जमा कचरे को दिसंबर 2026 के अंत तक हटाने का लक्ष्य रखा गया था।इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के कचरा प्रबंधन में अब केवल कचरा उठाने पर नहीं, बल्कि वर्षों से जमा कचरे की वैज्ञानिक सफाई और जमीन को पुनः उपयोग योग्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।


आखिरी सेल्फी” बनी अभियान का संदेश

ओखला में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का “आखिरी सेल्फी” वाला बयान इसी अभियान को सार्वजनिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर सामने आया। उनका कहना है कि कचरे के पहाड़ दिल्ली की पहचान नहीं होने चाहिए और सरकार का लक्ष्य इन्हें खत्म करना है। हालांकि, कचरे के पहाड़ों को पूरी तरह हटाने की प्रक्रिया तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और समय लेने वाली है। पुराने कचरे की मात्रा, नए कचरे का रोजाना उत्पादन, प्रसंस्करण क्षमता और अवशेष के वैज्ञानिक निपटारे जैसे कई कारक इसकी गति तय करते हैं। इसलिए सरकार की घोषित समयसीमा और वास्तविक प्रगति को लगातार निगरानी में रखना महत्वपूर्ण होगा।नई प्रसंस्करण सुविधाओं के शुरू होने और पुराने कचरे के लगातार निस्तारण से दिल्ली के तीन बड़े लैंडफिल स्थलों का स्वरूप बदलने की उम्मीद है। अब मुख्यमंत्री का यह संकल्प कितना जल्दी जमीन पर पूरी तरह दिखाई देता है, यह आने वाले महीनों में सामने आएगा।

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