सांसदों की अनसुनी पर विकास उपाध्याय का तंज- जब जनप्रतिनिधि बेबस, तो आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा ?....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में राजनीतिक हलचल के बीच पूर्व संसदीय सचिव और छाया सांसद विकास उपाध्याय ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस शासन प्रणाली में सत्ताधारी दल के सांसदों और जनप्रतिनिधियों की आवाज ही दबा दी जाए या उनकी सिफारिशों को अनसुना कर दिया जाए, वहां आम जनता के हितों की रक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
हाल ही में सामने आए घटनाक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की आंतरिक बैठकों में मंत्रियों के रवैये को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ चुका है। वर्तमान सांसदों द्वारा यह आरोप लगाया जाना कि उनकी बातों को तरजीह नहीं दी जा रही है और प्रशासनिक स्तर पर उनकी अनदेखी हो रही है, शासन व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना पड़े, तो सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामान्य नागरिकों की क्या स्थिति होगी।
विकास उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश की जनता आज महंगाई, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और रोजमर्रा की बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। आम आदमी अपनी फरियाद लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन जब जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही है, तो आम जनता की आवाज शासन तक कैसे पहुंचेगी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में अहंकार के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। सरकार का मुख्य दायित्व जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। मात्र आश्वासन देने से जनता का भला नहीं होने वाला, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने मांग की है कि शासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाए और जनता तथा जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करे।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments