टाटा पावर को बिजली वितरण लाइसेंस देने के खिलाफ विकास उपाध्याय ने खटखटाया न्यायालय का दरवाजा, भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप...
पत्रकार अमृतेश्वर सिंह क़लम से :-
रायपुर धरसीवा मंदिर हसौद और अभनपुर में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के षड्यंत्र के खिलाफ विकास उपाध्याय ने न्यायालय में याचिका दायर की...

भाजपा सरकार का जनविरोधी चेहरा उजागर...
टाटा पावर के बहाने छत्तीसगढ़ की जनता और बिजली व्यवस्था को पूंजीपतियों के हाथ बेचने का षड्यंत्र...
टाटा को वितरण लाइसेंस मानदंड अवहेलना में सरकार की सांठगांठ...
अन्य राज्यों में निजी समानांतर लाइसेंस का कड़वा सच...
‘‘पीएम सूर्य घर योजना’’ - मुफ्त बिजली के फर्जी जाल में जनता को बीजेपी फाँस रही है...
भाजपा की मोदी शासन और विष्णु सरकार उद्योग क्षेत्र की कमर तोड़ना चाहती है...
केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार की ऊर्जा क्षेत्र में पूर्ण विफलता...
कांग्रेस का जनहितकारी प्रबंधन जनता ने अनुभव किया है - विकास उपाध्याय...

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था के निजीकरण की सुगबुगाहट के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस (पैरालेल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस) दिए जाने के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर की है। उन्होंने भाजपा सरकार पर राज्य की संपत्तियों और बिजली व्यवस्था को पूंजीपतियों के हाथों बेचने का गंभीर आरोप लगाया है।
विकास उपाध्याय ने बताया कि टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) में याचिका (क्रमांक 89/2026) लगाकर अगले 25 वर्षों के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों में बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस मांगा है। उन्होंने इसे जनविरोधी, गरीब-विरोधी और छत्तीसगढ़-विरोधी कदम बताते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अधिवक्ता शशांक मिश्रा, शुभेंद्रु प्रकाश राय और संतोष कुमार के माध्यम से दायर याचिका में उपाध्याय ने राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
वितरण लाइसेंस में सांठगांठ: टाटा ने अगले 5 वर्षों में नेटवर्क स्थापित करने के लिए मात्र 435 करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी दी है। उपाध्याय का दावा है कि इतनी कम राशि में नए सब-स्टेशन और लाइनें बिछाना असंभव है। इसका सीधा अर्थ है कि कंपनी अंततः सरकारी नेटवर्क (CSPDCL) का ही उपयोग करेगी, जिसमें सरकार की पूरी सहमति है।
मुनाफे वाले क्षेत्रों पर नजर (चेरी पिकिंग): टाटा पावर ने केवल उन 4 तहसीलों को चुना है जहां से सबसे ज्यादा राजस्व आता है। यदि उच्च राजस्व वाले वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्र निजी कंपनी के पास चले गए, तो 'नो प्रॉफिट, नो लॉस' पर काम करने वाली सरकारी कंपनी CSPDCL दिवालिया हो जाएगी। इसका सीधा नुकसान किसानों और बीपीएल उपभोक्ताओं को होगा जिन्हें सब्सिडी पर बिजली मिलती है।
स्मार्ट मीटर के नाम पर लूट और महंगी बिजली: कांग्रेस नेता का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद पूरे प्रदेश में बिजली बिलों में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने आशंका जताई है कि निजीकरण के बाद मेंटेनेंस के नाम पर उपभोक्ताओं का शोषण होगा और बिजली की दरें बेतहाशा बढ़ेंगी।
उद्योगों और रोजगार पर खतरा: रायपुर और आसपास के क्षेत्र प्रमुख औद्योगिक केंद्र हैं। महंगी बिजली के कारण स्थानीय स्पंज आयरन रोलिंग मिल और अन्य लघु-मध्यम उद्योग मंदी की चपेट में आ जाएंगे, जिससे लाखों युवाओं का रोजगार छिन सकता है।
योजनाओं पर सवाल: उपाध्याय ने केंद्र सरकार की 'पीएम सूर्य घर योजना' को भी छलावा बताया और कहा कि यह मुफ्त बिजली के नाम पर जनता को गुमराह करने का एक फर्जी जाल है।
विद्युत कंपनियों के प्रबंधन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के ट्रैक रिकॉर्ड की तुलना करते हुए विकास उपाध्याय ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों ने मुनाफे में चल रहे छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) को तोड़कर घाटे वाली कंपनियों में बदल दिया था, जबकि कांग्रेस सरकार (2018-2024) ने कुशल प्रबंधन से इस घाटे को कम किया।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि टाटा पावर के लाइसेंस आवेदन को तुरंत निरस्त नहीं किया गया और सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की गई, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर विधानसभा तक उग्र आंदोलन करेगी।






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