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विदिशा: चेक डैम के खंभों पर कूदकर स्कूल पहुंचने को मजबूर छात्र....

Aug 7
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली/विदिशा मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में स्कूली छात्रों के जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने शुक्रवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि कई छात्र स्कूल जाने के लिए बेतवा नदी पार करते समय चेक डैम के खंभों पर कूदकर खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं।


NHRC ने कहा कि छात्रों को रोजाना अपनी जान खतरे में डालकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। बताया गया है कि छात्र सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करने से बचने के लिए इस जोखिम भरे रास्ते को चुनते हैं। चेक डैम के खंभों से होकर नदी पार करने पर स्कूल की दूरी लगभग 13 किलोमीटर से घटकर केवल 1.5 किलोमीटर रह जाती है।


मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को गंभीर मानते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। आयोग ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में छात्रों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों और वर्तमान स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विदिशा जिले के कुछ क्षेत्रों में रहने वाले छात्र स्कूल जाने के लिए बेतवा नदी को पार करते हैं। नदी पार करने के लिए वे चेक डैम के उन हिस्सों का सहारा लेते हैं, जहां थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से यह खतरा और बढ़ जाता है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रों के सामने स्कूल पहुंचने के लिए सुरक्षित और आसान रास्ते की कमी है। लंबा रास्ता होने के कारण कई बच्चे समय बचाने के लिए नदी पार करने का जोखिम उठाते हैं। हालांकि, यह रास्ता कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। NHRC ने अपने नोटिस में बच्चों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया है। आयोग ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करना हर बच्चे का अधिकार है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए। प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे छात्र सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंच सकें।


इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण बच्चे मजबूरी में खतरनाक रास्ता अपनाने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल तक पहुंच की समस्या कई जगह देखने को मिलती है। कई बार सड़क, पुल या परिवहन सुविधा की कमी के कारण बच्चे जोखिम भरे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में स्थायी समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का विकास जरूरी है। NHRC के नोटिस के बाद अब राज्य सरकार को इस मामले में जवाब देना होगा। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह छात्रों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएगा और ऐसी व्यवस्था करेगा जिससे बच्चों को नदी पार करने जैसी जोखिम भरी स्थिति से गुजरना न पड़े। स्थानीय लोगों की मांग है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द सुरक्षित पुल, वैकल्पिक मार्ग या परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। फिलहाल, NHRC की कार्रवाई के बाद इस मामले पर प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है। अब सभी की नजर सरकार की रिपोर्ट और छात्रों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर है।

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