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सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं – सत्य, कानून और न्याय की विजय....

Jul 16
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

रायपुर, छत्तीसगढ़,

"सत्यमेव जयते" केवल भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि हमारी न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की आत्मा है। इतिहास साक्षी है कि असत्य, दुष्प्रचार और भ्रम कुछ समय के लिए लोगों को प्रभावित अवश्य कर सकते हैं, किन्तु अंततः विजय सत्य, कानून और प्रमाणों की ही होती है।


पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) एवं उससे संबद्ध संस्थाओं को लेकर अनेक प्रकार की भ्रामक जानकारियाँ, दावे और आरोप सार्वजनिक रूप से प्रसारित किए गए। संस्था का कहना है कि इन घटनाओं के कारण शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा समाज के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई और संस्था की प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा।


संस्था के अनुसार, कुछ व्यक्तियों द्वारा संस्था के माननीय बिशप, सचिव तथा अन्य वैधानिक पदाधिकारियों के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए गए तथा ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए गए जिन्हें संस्था भ्रामक, अपूर्ण अथवा वास्तविक अभिलेखों से मेल न खाने वाला मानती है। संस्था का यह भी कहना है कि इन कथित दस्तावेजों और दावों के आधार पर उसकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया।


संस्था का स्पष्ट मत है कि किसी भी संस्था का संचालन केवल उसके वैधानिक संविधान, पंजीकृत अभिलेखों, सक्षम प्राधिकारी के आदेशों तथा कानून के अनुसार ही होता है। व्यक्तिगत दावे, अफवाहें या सार्वजनिक बयान किसी भी वैधानिक अधिकार का स्थान नहीं ले सकते।


समय के साथ उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों, प्रशासनिक कार्यवाहियों तथा सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद का समाधान केवल कानून और प्रमाणों के आधार पर ही संभव है। सत्य को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, किन्तु उसे पराजित नहीं किया जा सकता।


संस्था यह भी स्पष्ट करती है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है अथवा किसी प्रकार के कूटरचित, भ्रामक या असत्य दस्तावेजों का उपयोग किया गया है, तो ऐसे सभी विषय सक्षम न्यायालयों एवं वैधानिक प्राधिकारियों के समक्ष विचाराधीन हैं अथवा विधि के अनुसार प्रस्तुत किए जा रहे हैं। संस्था को पूर्ण विश्वास है कि न्यायिक एवं वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्य पूर्ण रूप से सामने आएगा।


यह समय किसी व्यक्ति की हार या जीत का नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, संस्थागत गरिमा और विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा का है। हम सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों एवं समाज के सम्मानित नागरिकों से विनम्र आग्रह करते हैं कि किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पूर्व उसके आधिकारिक स्रोत, सक्षम प्राधिकारी के आदेश एवं प्रमाणित अभिलेखों का अवश्य परीक्षण करें।


हमारा उद्देश्य किसी के प्रति दुर्भावना रखना नहीं, बल्कि संस्था की गरिमा, कानून के शासन तथा सत्य की प्रतिष्ठा को बनाए रखना है।


संदेश:-

"झूठ कुछ समय तक शोर मचा सकता है,

लेकिन सत्य को पराजित नहीं कर सकता।

समय, कानून और प्रमाण अंततः सत्य के पक्ष में खड़े होते हैं।

सत्य को अपनी रक्षा के लिए किसी प्रचार की आवश्यकता नहीं होती,

क्योंकि उसका सबसे बड़ा साक्षी स्वयं समय होता है।"

सत्यमेव जयते।

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