छत्तीसगढ़ में नकली शराब से बढ़ रहा हड्डियों की गंभीर बीमारी का खतरा, स्वास्थ्य सेवाओं और आबकारी नीति पर खड़े हुए सवाल...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर। राज्य में अवैध और नकली मदिरा के सेवन से नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके अत्यधिक सेवन से हड्डियों के कमजोर होने और वेस्कुलर नेक्रोसिस जैसी गंभीर समस्याएं तेजी से उभर रही हैं। शासन की राजस्व प्राप्ति की प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक हलकों में भी विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं।
विगत दिनों क्षेत्र में नकली होलमार्क और तय मूल्य से अधिक दरों पर मदिरा बिक्री के मामले सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। जानकारों का कहना है कि इसके निर्माण में उपयोग होने वाले हानिकारक तत्व सीधे तौर पर रीढ़ की हड्डी और शारीरिक ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं। राजनेता विकास उपाध्याय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासन को केवल वित्तीय लाभ की चिंता करने के बजाय आमजन के जीवन रक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
चिकित्सकीय परामर्श के मुताबिक अनियंत्रित मदिरापान से शरीर में कैल्शियम व विटामिन डी का संतुलन बिगड़ता है, जिससे अस्थि घनत्व कम होता है और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ जाता है। रीढ़ और कमर में होने वाली असहजता को कई बार लोग सामान्य समझकर टाल देते हैं, जो आगे चलकर विकराल रूप ले सकती है। हालांकि हर शारीरिक समस्या का कारण मदिरा नहीं होती, फिर भी इसके दुष्प्रभावों से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने, नशामुक्ति केंद्रों को सक्रिय करने तथा पीड़ित व्यक्तियों के समुचित उपचार की मांग उठाई जा रही है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतनिधियों का स्पष्ट कहना है कि जनता के शारीरिक कल्याण को ताक पर रखकर वित्तीय लक्ष्य साधना कतई उचित नहीं है।






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