नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी आधार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष से कम उम्र की पीड़िता की शारीरिक संबंधों के लिए दी गई सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता है। अदालत ने अंबिकापुर की विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा दोषी को सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। यह मामला नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म से जुड़ा है।
घटना जनवरी 2017 की है। आरोपी पीड़िता का दूर का रिश्तेदार था और उसके घर पर रुका हुआ था। इसी दौरान उसने नाबालिग से कई बार संबंध बनाए। परिजनों द्वारा रोके जाने के बाद भी आरोपी मोबाइल के जरिए लगातार संपर्क में रहा और 17 जनवरी 2017 को उसे अपने साथ भगा ले गया। पुलिस ने 29 जनवरी 2017 को पीड़िता को बरामद किया, जिसके बाद उसने आरोपी द्वारा लगातार दुष्कर्म और मारपीट करने की बात कही।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोनों की आपसी सहमति और स्कूल के मूल रिकॉर्ड की अनुपस्थिति का दावा किया। हालांकि, अदालत ने पांचवीं और दसवीं की अंकसूची के दस्तावेजों को पुख्ता मानते हुए स्पष्ट किया कि घटना के वक्त पीड़िता की उम्र 17 साल 6 महीने थी। हाईकोर्ट ने माता-पिता और जांच अधिकारियों की गवाही को भरोसेमंद मानते हुए कहा कि नाबालिग की सहमति आरोपी को उसके अपराध से नहीं बचा सकती।






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