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ज्ञानेश्वरी की सफलता से राज्य के युवा लेंगे प्रेरणा, खेलों के लिए तैयार होगा अच्छा वातावरण - अरुण साव.....

Aug 5
3 min read
  • पिता के सपने ने दी आगे बढ़ने की प्रेरणा, कॉमनवेल्थ गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट ज्ञानेश्वरी यादव ने साझा की अपने संघर्ष और सफलता की कहानी....

  • उप मुख्यमंत्री ने ज्ञानेश्वरी और उनके माता-पिता का किया सम्मान....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंग की कलम से -

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में देश के लिए रजत पदक जीतने वाली राजनांदगांव की युवा खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव को सम्मानित किया। उन्होंने नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में उनके माता - पिता को भी सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री साव और ज्ञानेश्वरी ने इस दौरान प्रेस-कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संयुक्त संचालक प्रभाकर पाण्डेय और उप संचालक रश्मि ठाकुर सहित भारोत्तोलन संघ के पदाधिकारी एवं विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ी भी इस दौरान मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस - कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज ऐतिहासिक और गौरव का पल है। हम छत्तीसगढ़ और भारत की बेटी ज्ञानेश्वरी का अभिनंदन कर रहे हैं, जिन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम रोशन किया है। ज्ञानेश्वरी की इस उपलब्धि से खेलों के लिए एक नए वातावरण की शुरुआत छत्तीसगढ़ में होगी। मैं उनके पिता दीपक यादव और माता दुर्गा यादव का भी हार्दिक अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने ऐसी होनहार बेटी को जन्म दिया जिन्होंने दुनिया में भारत और छत्तीसगढ़ को प्रतिष्ठा दिलाई। छत्तीसगढ़ के युवा ज्ञानेश्वरी से प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन करेंगे, ऐसी उम्मीद है।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य में हमारी सरकार बनने के बाद से हम लगातार खेल और खिलाड़ियों की तरक्की एवं बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। खेलों और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने हम बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक, स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव जैसे आयोजन लगातार कर रहे हैं। खेल अलंकरण और उत्कृष्ट खिलाड़ियों की घोषणा को हमने पुनः शुरू किया है। छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी लगातार काम हो रहे हैं। राज्य में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें अच्छा प्रशिक्षण दिलाने, उन्हें तराशने का और संवारने की जरूरत है। आने वाले समय में और भी प्रतियोगिताओं में भारत को पदक मिले, इसकी तैयारी हमने प्रारंभ कर दी है।


चुनौतियों ने बनाया और मजबूत - ज्ञानेश्वरी यादव

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता राजनांदगांव की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ समय पहले विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर पहली बार उतरते समय वह काफी दबाव और घबराहट महसूस कर रही थीं। उस समय ऐसा लग रहा था कि यह एक ऐसा मुकाबला है, जिसका अनुभव पहले कभी नहीं हुआ। हालांकि उसी अनुभव ने उन्हें सिखाया कि बड़ी प्रतियोगिताओं का सामना कैसे करना है और मानसिक रूप से स्वयं को किस तरह तैयार करना है।

ज्ञानेश्वरी ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप से मिले अनुभव के बाद उन्होंने हर प्रतियोगिता के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करना सीखा। किसी भी बड़े मंच पर पहुंचकर उनका लक्ष्य अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देना रहता है और यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके पिता का सपना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। शुरुआती दिनों में उनके पिता साइकिल से उन्हें जिम तक लेकर जाते थे। उसी दौरान उनके पिता ने उनसे कहा था कि वह स्वयं कभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते हैं कि उनकी बेटी भारत का प्रतिनिधित्व करे और तिरंगा ऊंचा लहराए।


भावुक होते हुए ज्ञानेश्वरी ने कहा कि उनके पिता ने उनके लिए अथक मेहनत की है। उन्होंने बताया कि उनके खान-पान से लेकर प्रशिक्षण तक हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान उनके पिता ने रखा। परिवार के बेहतर भविष्य और उनकी तैयारी के लिए उनके पिता रात-रात भर मेहनत करते थे। आज उनकी हर उपलब्धि के पीछे उनके पिता का त्याग, समर्पण और संघर्ष ही सबसे बड़ी प्रेरणा है। ज्ञानेश्वरी ने कहा कि जीवन में आने वाली हर चुनौती ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है। कठिन परिस्थितियों से मिले अनुभवों ने उन्हें न केवल बेहतर खिलाड़ी बनाया, बल्कि बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने का हौसला भी दिया।

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