बदहाल सड़क और खराब बाईपास में एक ही यात्री बस दिन में दो बार फंसी....
- ANIS LALA DANI

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ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
पेंड्रा निर्माणाधीन नेशनल हाईवे क्रमांक-45 की बदहाल और गुणवत्ताहीन सड़क अब वाहन चालकों और आम राहगीरों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनती जा रही है। सड़क निर्माण की धीमी गति और जगह-जगह बनाए गए खराब बाईपास के चलते आए दिन वाहन फंस रहे हैं और घंटों जाम की स्थिति बन रही है। ताजा मामला चपोरा गांव के पास सामने आया, जहां एक यात्री बस एक ही दिन में दो बार सड़क में फंस गई। जानकारी के मुताबिक, चपोरा गांव के पास बारिश के कारण खराब और दलदली हुई सड़क पर एक यात्री बस फंस गई। बस को बाहर निकालने के लिए क्रेन की मदद लेनी पड़ी। किसी तरह बस को निकालकर बगल से बनाए गए बाईपास मार्ग से आगे रवाना किया गया, लेकिन बाईपास की कम चौड़ाई और खराब स्थिति के कारण बस फिर फंस गई। इसके बाद दूसरी बार क्रेन बुलाकर बस को बाहर निकाला गया।
एक ही बस के दो बार फंसने से उठे सवाल
एक ही दिन में एक ही बस के दो बार फंसने की घटना ने निर्माणाधीन हाईवे की व्यवस्था और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के बाद सड़क की स्थिति और खराब हो गई है। कई जगह सड़क कीचड़ में तब्दील हो चुकी है, जबकि वाहनों की आवाजाही के लिए बनाए गए वैकल्पिक मार्ग भी पर्याप्त चौड़े और सुरक्षित नहीं हैं।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार यातायात जारी है, तो वाहन चालकों की सुरक्षा और सुचारु आवागमन के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं। यदि बाईपास ही वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग है, तो उसकी मजबूती, चौड़ाई और सुरक्षा सुनिश्चित करना निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
जाम से आम लोगों की बढ़ी परेशानी
वाहनों के बार-बार फंसने से यातायात बाधित हो रहा है और लंबा जाम लगने के कारण मरीजों, यात्रियों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और स्थानीय ग्रामीणों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
लोगों ने गुणवत्ता जांच करवाने की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माणाधीन NH-45 के सभी डायवर्जन और बाईपास मार्गों की तत्काल गुणवत्ता जांच कराई जाए। खराब हिस्सों को दुरुस्त कराने के साथ निर्माण एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जाए। लोगों का कहना है कि विकास के लिए निर्माण कार्य जरूरी है, लेकिन निर्माण की कीमत आम जनता को रोजाना जाम, कीचड़ और दुर्घटना के खतरे के रूप में नहीं चुकानी चाहिए।




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