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राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण में दिखा बस्तर का गौरव, झिटकू–मिटकी को मिला राष्ट्रीय सम्मान-केदार कश्यप.....

Aug 5
2 min read
  • बस्तर की लोकसंस्कृति और जनजातीय विरासत को मिला देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान में विशिष्ट स्थान.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

रायपुर - राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी स्वतंत्रता दिवस 'एट होम' (At Home) निमंत्रण पत्र में इस वर्ष बस्तर की ऐतिहासिक लोकगाथा 'झिटकू–मिटकी' के प्रतीक (मोटिफ) को स्थान दिया जाना पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गौरव और सम्मान का विषय है। यह कालात्मक आकृति बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली विशिष्ट पहचान का प्रतीक है।


वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर आज राष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर रही है। झिटकू–मिटकी की लोकगाथा सदियों से बस्तर के जनजीवन, लोकआस्था और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा रही है। राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण में इस प्रतीक का स्थान मिलना प्रत्येक बस्तरवासी और छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व का क्षण है।


उन्होंने कहा कि लगभग 300 वर्ष पुरानी झिटकू–मिटकी की अमर प्रेमगाथा केवल प्रेम और समर्पण की कथा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा (बेल मेटल) कला में झिटकू–मिटकी की प्रतिमाएँ विशेष स्थान रखती हैं और वर्षों से सम्मान-चिह्न के रूप में भेंट की जाती रही हैं।


मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान भी छत्तीसगढ़ की ओर से झिटकू–मिटकी की पारंपरिक ढोकरा कलाकृति राष्ट्रपति को भेंट की गई थी। अब उसी प्रतीक का स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में उपयोग इस बात का प्रमाण है कि बस्तर की लोककला और जनजातीय संस्कृति देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्थानीय संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान और पहचान देने का कार्य निरंतर हो रहा है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी बस्तर की संस्कृति, लोककला और जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने के लिए सतत प्रयासरत है।


मंत्री कश्यप ने कहा कि राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र पर झिटकू–मिटकी का अंकन केवल एक सांस्कृतिक प्रतीक का चयन नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता, गौरव और समृद्ध जनजातीय विरासत को पूरे देश के सामने सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का ऐतिहासिक अवसर है। यह प्रत्येक छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व और आत्मसम्मान का विषय है।

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